होलिका दहन पर पूरे दिन रहेगा भद्रा का अशुभ साया, सिर्फ इतने समय में करना होगा होलिका दहन/पूजन
<p>इस साल होलिका दहन के दिन सुबह से ही भद्रा लग जाएगी। भद्राकाल में किसी भी तरह के शुभ काम को करने की मनाही होती है, ऐसे में तमाम लोग इस बात को लेकर कन्‍फ्यूज हैं कि आखिर भद्राकाल के रहते होलिका दहन कब किया जाएगा ?ज्‍योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र से जान लीजिए होलिका दहन का शुभ मुहूर्त.</p>
कितने बजे होगा होलिका दहन
इसके बाद ही होलिका दहन करना आपके लिए मंगलकारी और शुभ होगा। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और कहा जाता है कि इससे समृद्धि और खुशियाँ आती हैं और सभी नकारात्मकता और बीमारियाँ नष्ट हो जाती हैं। इस बार होली 24 और 25 मार्च को मनाई जाएगी। 24 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन रंगों की होली खेली जाएगी।
तिथि: होली सोमवार, 25 मार्च 2024 को
होलिका दहन :रविवार, 24 मार्च 2024 को
होलिका दहन 2024 का शुभ समय 24 मार्च रात 11:13 बजे से रात 12:27 बजे तक है।
समय: पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – 24 मार्च 2024 को प्रातः 09:54 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त : 25 मार्च 2024 को दोपहर 12:29 बजे
भद्रापुच्छ में भी कर सकते हैं होलिका दहन?
इसके अलावा 24 मार्च को भद्रामुखकाल 7 बजकर 54 मिनट से 10 बजकर 7 मिनट तक रहेगा और भद्रापुच्छकाल 6 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। इसलिए कुछ लोग भद्रामुख को त्याग कर भद्रापुच्छकाल में होलिका दहन कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, भद्रा रहित काल में ही होलिका दहन करना शुभ रहता है लेकिन, विशेष परिस्थितियों में भद्रा पुच्छ में होलिका दहन किया जा सकता है।
होलिका दहन की विधि
होलिका दहन के लिए लकड़ियों को इकट्ठा करें। इसके बाद कच्चा सूत से तीन या सात बार इनको लपेट लें।
इसके बाद सभी लकड़ियों पर थोड़ा गंगाजल डालकर उन्हें शुद्ध कर लें। इसके बाद उन पर पानी, फूल और कुमकुम छिड़ककर उनकी पूजा करें।
पूजा के लिए माला रोली, अक्षत, साबुत हल्दी, गुलाल, नारियल, बताशे-गुड का प्रयोग करें।
इसके बाद होलिका की पूजा करें और फिर होलिका की कम से कम 5 या 7 परिक्रमा करें।
इस बात का खास ख्याल रखें की होलिका की पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
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