Chaitra Navratri 2023 : नवरात्रि का छठवां दिनः मां कात्यायनी की आराधना से दूर होंगी कन्या विवाह और गृहस्थी को लेकर सभी तरह की बाधाएं..

<p><em>आज यानी 27 मार्च 2023 को चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है।आज के दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त मां कात्यायनी की सच्चे मन से पूजा आराधना करते हैं,उन्हें मां कात्यायनी की कृपा से वैवाहिक जीवन में कभी किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा जिस लड़का या लड़की के शादी में रुकावट आ रही हैं वे यदि माता कात्यायनी की पूजा करते हैं तो उन्हें माता रानी की कृपा से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की पूजा विधि, स्तुति मंत्र, उपाय और आरती के बारे में...</em></p> <p><em><img alt="" src="https://www.newsthikana.com/uploads/news/1679886408maa_katyayani.jpg" style="height:450px; width:800px" /></em></p>

Chaitra Navratri 2023 : नवरात्रि का छठवां दिनः मां कात्यायनी की आराधना से दूर होंगी कन्या विवाह और गृहस्थी को लेकर सभी तरह की बाधाएं..
27-03-2023 - 08:09 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

मां दुर्गा की छठी शक्ति मां कात्यायनी को समर्पित है। ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण इनका नाम कात्यायनी रखा गया।पौराणिक कथा के अनुसार कात्यायन ऋषि की कोई पुत्री नहीं थी। महर्षि ने पुत्री प्राप्ति की इच्छा के लिए भगवती मां की उपासना की और कठिन तपस्या की। महर्षि की कठिन तपस्या से मां दुर्गा प्रसन्न हुईं और कात्य गोत्र के महर्षि कात्यायन के घर मां कात्यायनी का जन्म हुआ। मां कात्यायनी बेहद गुणवती कन्या रहीं। इनके जैसी गुणवान, रूपवती और ज्ञानवान कन्या पूरे संसार में कहीं नहीं रही।

शुभ मुहूर्त 
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06.35 - शाम 06.58
मां कात्यायनी की पूजा के शुभ योग
रवि योग - सुबह 06.18 - दोपहर 03.27
सर्वार्थ सिद्धि योग - पूरे दिन
अमृत सिद्धि योग - 27 मार्च 2023, दोपहर 03.27 - 28 मार्च 2023, सुबह 06.16
आयुष्मान योग - 26 मार्च 2023, रात 11.33 - 27 मार्च 2023, रात 11.20

मां कात्यायनी  का स्वरूप 
मां कात्यायनी का स्वरूप भव्य और दिव्य है और इनका वर्ण चमकीला और सवारी सिंह है। इनकी चार भुजाएं हैं इसलिए मां कात्यायनी को चतुर्भुज देवी भी कहा जाता है।.मां कात्यायनी ने प्रत्येक भुजा में तलवार, कमल, अभय मुद्रा और वर मुद्रा धारण ली है।

मां कात्यायनी की पूजा विधि 
मां कात्यायनी का संबंध बृहस्पति और आंशिक संबंध शुक्र से भी है।ऐसे में इनकी पूजा में पीले रंग का ज्यादा प्रयोग करें। देवी कात्यायनी की उपासना गोधूलि वेला में करें।  मां कात्यायनी को 16 श्रृंगार की सामग्री और सुगंधित पुष्प अर्पित करें और इन्हें शहद का भोग लगाएं। रोली, मौली, हल्दी, अक्षत, फूल अर्पित करें। मां कात्यायनी  की पूजा के साथ भगवान शिव की भी पूजा करनी चाहिए।ऐसी मान्यता है कि मां कात्यायनी के पूजा से गृहस्थ जीवन में खुशियां आती हैं। 
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः का एक माला जाप करें। आरती करें और फिर जागरण कर देवी के भजन-कीर्तन करें।

मां कात्यायनी का भोग
माता को पीला रंग और शहद का भोग बहुत प्रिय है।

मां कात्यायनी स्तुति मंत्र-

"क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।"

"या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।"

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।