कांग्रेसी उम्मीदवार गहतोडी ने तोड़ी चुप्पी और कहा, मुझे अपनों से मिला धोखा.. !
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अब यह खबर पुरानी हो चुकी है कि उत्तराखण्ड के चंपावत उपचुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं निर्मला गहतोडी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुकाबले 3223 वोट ही मिल सके। धामी को 58258 वोट मिले और उन्होंने अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उपचुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार गहतोडी की जमानत जब्त हो गई। ऊपर शीर्षक के ठीक नीचे जो तस्वीर में ये जो अकेली महिला बैठीं हैं, वह गहतोडी ही हैं। वे चार दिन पहले यानी मतदान वाले दिन अकेली ही गोविंद वल्लभ पंत की मूर्ति के नीचे चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठी थीं।
गहतोडी ने अब मीडिया के सामने अपनी चुप्पी तोड़ी है और अपने अकेलेपन का दर्द बयां किया है। मुख्यमंत्री धामी से मुकाबले में खड़ी रहीं गहतोडी का कहना है, ‘ अपनों ने ही मुझे धोखा दिया। मेरे पास बस 137 साल पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का चुनाव निशान था। इस चुनाव में मैं अकेली ही चलती रही। अनेक वरिष्ठ नेताओं के मना करने के बाद भी मैंने पार्टी की खातिर इस चुनाव में उतरने पर रजामंदी जताई लेकिन मुझे अकेले छोड़ दिया गया।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में जब विधानसभा चुनाव हुए तो भाजपा ने बाजी मारी किंतु मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुनाव हार गये थे। धामी के लिए भाजपा के विधायक कैलाश गहतोडी ने अपनी चंपावत विधानसभा सीट छोड़ी, तो इसके विपरीत कांग्रेस ने चुनाव में धामी को चुनौती देने के लिए ऐसा नाम चुना, जिसे सुनकर ही लग रहा था कि उसने भाजपा को वॉकओवर ही दे दिया है। उत्तराखण्ड के राज्य बनने के बाद से चंपावत विधानसभा सीट से हेमेश खर्कवाल ही चुनाव लड़ते रहे हैं। कांग्रेस ने लगातार पांच बार उन्हें ही टिकट दिया लेकिन इस बार जब मुश्किल मुकाबले का वक्त आया तो धामी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने के लिए निर्मला गहतोडी को खोजा गया। इस फजीहत से हरीश रावत के विश्वासपात्र खर्कवाल को चुपचाप किनारे कर दिया गया।
गहतोडी का कहना है कि चुनाव प्रचार शुरू होने से मतदान पूरा होने तक कांग्रेस के 90 प्रतिशत वरिष्ठ कार्यकर्ता गायब रहे। जब उन्हें बुलावा भेजा तो सबने कई-कई बहाने बनाए। यही नहीं खुद उन्हें (गहतोडी को) मैदान से हटाने के लिए प्रलोभन दिए गए लेकिन वे मैदान में डटीं रहीं। उन्होंने कहा कि संगठन से लेकर कई वरिष्ठ और जिम्मेदार नेताओं का उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि पार्टी के अधिकतर दिग्गज नेता, यहां तक कि फरवरी 2022 में हुए आम चुनाव में टिकट के लिए आवेदन करने वाले कई नेता भी कांग्रेस से अलग हो गए थे। हमारे अधिकतर पदाधिकारी-कार्यकर्ता भाजपा की गोद में बैठ गए थे और बचे कार्यकर्ताओं में से भी 90 प्रतिशत तो जनता के बीच आने से भी कतराते रहे। कांग्रेस ने इस चुनाव को गंभीरता से नहीं लड़ा।
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