कहीं कांवड़ियों पर फूल बरसाए तो कहीं उनकी रक्षा को तैनात होकर मुस्लिम भाई कर रहे हैं सौहार्द्र पेश..!
<p><em>काशी में जब शिवभक्त कांवड़िये जब काशी से गुजरे तो सांप्रदायिक सौहार्द की आदर्श मिसाल कायम करते हुए मुस्लिम समुदाय ने उन पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। लोगों ने मुस्लिम समुदाय की ओर से की गई इस पहल की सराहना की और कहा कि उन्होंने भाईचारे की मिसाल कायम की है। लोगों ने इस काम को गंगा जमुनी तहज़ीब बताया और क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रशंसा की। वहीँ दूसरी तरफ कांवड़ यात्रा के दौरान मुस्लिम गोताखोर भी सांप्रदायिक सौहार्द के अलावा मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं। शामली में यमुना पर तैनात 25 गोताखोर यमुना में डूबने वालों की जान बचा रहे हैं। 10 वर्षों में अब तक 90 लोगों की जान इन गोताखोरों द्वारा बचाई जा चुकी है।</em></p> <p><img alt="" src="https://www.newsthikana.com/uploads/news/1688988045kawar1.jpg" /></p>
कांवड़ यात्रा के दौरान 25 गोताखोर तैनात हैं, और ये सभी मुस्लिम धर्म से हैं। हर वर्ष की भांति इस बार भी ये गोताखोरशिवभक्त कावड़ियों की सुरक्षा के लिए यमुना तट पर तैनात हो चुके हैं। पिछले दस साल में अब तक 90 से अधिक शिवभक्तों को सकुशल निकालकर सौहार्द की मिसाल कायम कर चुके हैं। पिछले आठ दिन से सभी गोताखोर कैराना पुल के अलावा शामली नहर, बडाैली पुल के पास तैनात होकर पानी में डूबने वालों को बचाने के लिए डटे हुए हैं।
नौशाद और बिल्लू ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान उन्हें प्रशासन से सिर्फ 400 रुपये मदद के नाम पर मिलते हैं। जिसमें गुजारा करना संभव नहीं है। मगर वे सभी इंसानियत के नाते शिवभक्तों की जान बचा रहे हैं। अन्य दिनों में सभी मजदूरी और खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं।
नहीं बचा पाते तो खाना नहीं खा पाते
गोताखोर जाहिद, नौशाद, बिल्लू का कहना है कि पिछले कई साल से शिवभक्तों को बचाने के लिए जुटे हैं। दस सालों में करीब 90 से अधिक को जिंदा बाहर निकाला है, जबकि कुछ मौत के मुंह में समा गए। लोगों को जिंदा निकालने पर मन को जो खुशी होती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यदि किसी को बचाने में कामयाब नहीं हो पाते रात को गम में खाना तक नहीं खाते। जब तक जीवित रहेंगे, लोगों की जान बचाने का कार्य जारी रहेगा।
गांव के सभी घरो में तैराक
एएसपी ओपी सिंह का कहना है कि सभी गोताखोरों की शिफ्टों में ड्यूटी लगाई गई है। सभी आपसी प्यार और सौहार्द की भी मिसाल कायम कर रहे हैं। जबकि हर समय गोताखोरों की जान जोखिम में रहती है। अन्य को भी इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। ग्राम प्रधान पति जाहिद हसन का कहना है कि गांव के अन्य लोग भी बिना किसी पारिश्रमिक के डूबे लोगों को निकालने में आगे रहते हैं। सभी को अलर्ट किया गया है
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