‘दिल्ली सेवा बिल’ से कितनी बदल जाएगी दिल्ली की व्यवस्था..?
<p><em>संसद में गतिरोध के कारण बुधवार को भी </em><strong><em> ‘</em></strong><em>दिल्ली सेवा बिल’ </em><em>पर चर्चा नहीं हो सकी थी लेकिन गुरुवार को यह लोकसभा में पारित हो ही गया। लोकसा में बिल पारित होने के साथ ही दिल्ली में आम जनता के बीच लगातार इस बात पर बहस जारी है कि यह नया कानून आ जाने के बाद दिल्ली कितनी बदल जाएगी? अधिकारियों की नियुक्ति कमेटी के जरिए होगी, जिसके चेयरमैन स्वयं मुख्यमंत्री होंगे।</em></p>
दिल्ली को सेवाओं के बारे में कानून बनाने का अधिकार भी होगा। लेकिन इसके बाद भी अधिकारियों से उनकी सेवाओं को लेकर कोई गलती होने पर दिल्ली सरकार के पास उसे दंडित करने का विकल्प बेहद सीमित होगा। ऐसे में आशंका यही रहेगी कि अधिकारी दिल्ली सरकार की बजाय उपराज्यपाल के जरिए केंद्र की ही बात सुनेंगे। ऐसे में दिल्ली का कामकाज प्रभावित होगा और सरकार बहुत से ऐसा काम नहीं कर पाएगी जो वह करना चाहती है।
आप का नया झूठ- भाजपा
दिल्ली भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि आम आदमी पार्टी का यह नया झूठ है, जिसमें वह बिना किसी आधार के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि नए कानून में भी दिल्ली सरकार को सेवाओं पर नया कानून बनाने की छूट दी गई है। इससे सरकार लोगों के लिए बेहतर कानून बना सकेगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की नियुक्ति अभी भी उस पैनल के माध्यम से होगी, जिसके चेयरमैन स्वयं मुख्यमंत्री होंगे। ऐसे में किसी सेवा को रोकने या बाधित किए जाने की बात कहना पूरी तरह झूठ है।
What's Your Reaction?