आईएमएफ अलर्टः श्रीलंका जैसे हालात हैं पाकिस्तान के, शुरू हो सकते हैं वैसे ही विरोध प्रदर्शन
पाकिस्तान कंगाल हो चुका है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने उसके हालात पर दया दिखाते हुए 1.16 अरब डॉलर की सहायता की दो किस्तें देने की बात कही है। लेकिन, इसके साथ ही पाकिस्तान में अगस्त 2022 में मुद्रास्फीति के रिकॉर्ड 27.3 प्रतिशत पर पहुंचने और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में जबर्दस्त तेजी के कारण देश में ‘सामाजिक विरोध और अस्थिरता’ की स्थिति पैदा होने की आशंका बन गयी है। यह चेतावनी किसी और ने नहीं स्वयं आईएमएफ जारी की है।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में मुद्रास्फीति को आंकने वाला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) अगस्त में 27.3 प्रतिशत पर पहुंच गया। वर्ष 1975 के बाद महंगाई दर पहली बार इतनी ऊंचाई पर पहुंची है। नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में यह स्थिति तब है जब खाद्य पदार्थों और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भीषण बाढ़ के प्रभाव का अभी आकलन किया जाना बाकी है।
आईएमएफ ने सातवीं और आठवीं समीक्षाओं के सारांश में कहा, ‘खाद्य वस्तुओं और ईंधन की ऊंची कीमतें सामाजिक विरोध और अस्थिरता को भड़का सकती हैं।’ आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान के छह अरब डॉलर के रुके हुए कार्यक्रम की सातवीं और आठवीं किस्त को मंजूरी दी थी।
विस्तारित कोष सुविधा (ईएफएफ) के तहत जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि गंभीर घरेलू और बाहरी वातावरण को देखते हुए परिदृश्य और कार्यक्रम कियान्वयन को लेकर जोखिम ऊंचा बना हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, विरोध-प्रदर्शन के जोखिम के अलावा सामाजिक-राजनीतिक दबाव भी ऊंचा रहने की आशंका है। इसका नीति और सुधार कार्यान्वयन पर भी असर पड़ सकता है।
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