सुप्रीम कोर्ट से विदाई के समय क्या कह कर देशवासियो के दिलों में बस गए जस्टिस अब्दुल नज़ीर
<p><strong>अयोध्या,राममंदिर,राइट तो प्राइवेसी,नोटबंदी जैसे ऐतिहासिक फैसले देने वाले सुप्रीम कोर्ट जस्टिस अब्दुल नज़ीर लगभग 6 साल के कार्यकाल के बाद कल यानी बुधवार (4 जनवरी) को रिटायर हो गए। अपने कार्यकाल के दौरान जस्टिस नजीर तीन तलाक, अयोध्या, नोटबंदी जैसे कई मामलों का फैसला देने वाली बेंच के सदस्य रहे हैं।अपने विदाई भाषण में कुछ ऐसी बातें कहीं जिन्हे सुनकर उन्होंने सब भारतवासियों का सबका दिल जीत लिया। </strong></p>
अयोध्या मामले पर था देश सर्वोपरि
जस्टिस नजीर ने कहा कि अयोध्या विवाद पर 9 नवंबर, 2019 को आए फैसले में अगर उन्होंने बाकी जजों से अपनी अलग राय रखी होती तो वो आज अपने समुदाय के हीरो बन गए होते, लेकिन उन्होंने समुदाय का नहीं, देशहित का सोचा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'देश के लिए तो जान हाजिर है।' जस्टिस नजीर अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद केस पर फैसला देने वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ में शामिल थे। सर्वोच्च न्यायालय की इस पीठ के सभी पांच जजों ने राम मंदिर के पक्ष में सर्वसम्मति से फैसला दिया था।
चाहते तो अलग फैसला देकर मुसलमानो में बन जाते हीरो
विदाई भाषण में जस्टिस नजीर ने कहा कि वो चाहते तो चार साथी जजों की राय से अलग होकर अपना फैसला दे सकते थे। उनका ऐसा करने पर भी फैसला राम मंदिर के पक्ष में ही रहता, लेकिन वो खुद मुस्लिम समुदाय की नजरों में हीरो बन जाते। लेकिन देशहित के लिए नवंबर 2019 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने विवादित स्थल को हिंदू पक्ष को सौंपकर मुस्लिमों को अलग से 5 एकड़ जमीन दे दी।
इस संस्कृत श्लोक को बनाया करियर का मूल मंत्र
जस्टिस नजीर ने अपने विदाई भाषण का अंत एक संस्कृत श्लोक के साथ किया। उन्होंने कहा, 'धर्मो रक्षति रक्षित:।' मतलब, आप धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म आपकी रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि यह श्लोक एक जज के रूप में उनके करियर का मूल मंत्र रहा है।
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विदाई कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, 'जस्टिस नजीर आम जन के जज हैं जो कानून की सभी शाखाओं के विशेषज्ञ हैं, खासकर दीवानी कानून (Civil Law) में। एक जज के रूप में जस्टिस नजीर का आचरण उत्कृष्ट रहा।'
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