भीलवाड़ा में बच्चियों की नीलामी मामला पकड़ रहा है तूल , मानव अधिकार आयोग के बाद महिला आयोग भी सामने आया, मांगे जवाब

<p>&bull; राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को जानकारी मिली थी कि राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में 8 से 18 वर्ष की लड़कियों का बाकायदा स्टांप पेपर पर बेचकर पैसे की वसूली की जाती है तथा विवाद होने पर जाति पंचायत उनकी माताओं के साथ बलात्कार का तुगलकी फरमान सुनाते हैं।</p> <p>&bull; इन बच्चों को यूपी,एमपी, मुंबई व दिल्ली के अलावा विदेशों तक में भेजा जा रहा है और गुलाम के रूप में उनका शोषण हो रहा है।</p> <p>&bull; आयोग के संज्ञान में ऐसे दो मामले आए, जिसमें छ: व आठ लाख में बच्चियां बेची गई, वहीं भीलवाड़ा के मामले में 5 लड़कियां बेची गई जबकि दूसरे मामले में पीड़ित की बेटी को तीन बार भेजा और वह चार बार गर्भवती हो गई।</p> <p>&bull; राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले पर नजर रखने के फैक्ट फाइंडिंग टीम का गठन किया ।</p>

भीलवाड़ा में बच्चियों की नीलामी मामला पकड़ रहा है तूल , मानव अधिकार आयोग के बाद महिला आयोग भी सामने आया, मांगे जवाब
29-10-2022 - 12:54 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

राजस्थान के भीलवाड़ा में कर्ज अदायगी के लिए बेटियों की नीलामी के मामले ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने आरोपों की जांच के संबंध में आज दो सदस्यों की तथ्यान्वेषी टीम का गठन किया। आयोग ने कहा कि मीडिया में आई कई खबरों का संज्ञान लिया गया है, जिनमें कहा गया है कि भीलवाड़ा में कर्ज अदायगी के विवादों को निपटाने के लिए लड़कियों की नीलामी की जा रही है।
आयोग ने कहा कि खबरों के अनुसार कई मामलों में स्टांप पेपर पर लिखकर लड़कियों को वेश्यावृत्ति के लिए बेच दिया जाता है। कुछ मामलों में, विवादों के निपटारे के लिए खाप (जाति) पंचायतों के फरमान पर उनकी माताओं के साथ दुष्कर्म किया जाता है। 
आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, 'एनसीडब्ल्यू की एक टीम को भीलवाड़ा भेजा जा रहा है। सोमवार को मैं एसपी और मुख्य सचिव से मिलूंगी. ऐसी कई घटनाएं पिछले कुछ सालों से आती जा रही हैं, मगर दुखद बात यह है कि इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।'
राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया संज्ञान
आयोग ने अपने बयान में इन अपराधों को बेहद भयावह और दर्दनाक बताया है> राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने राजस्थान के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तत्काल कारवाही की मांग की है। साथ ही कार्रवाई से अवगत कराने की भी कहा है।

आयोग ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को तत्काल संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए भी लिखा है। पत्र की एक प्रति पुलिस अधीक्षक (एसपी) भीलवाड़ा को भेजी गई है। शीर्ष बाल अधिकार निकाय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो भी आरोपों की विस्तृत जांच करने के लिए 7 नवंबर को भीलवाड़ा जाएंगे। कानूनगो ने कहा कि वह इसमें संलिप्त लोगों और प्रभावित गांवों की जांच करेंगे.

भाजपा ने साधा गहलोत सरकार पर निशाना
वहीं, जयपुर में बीजेपी सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार में बाजार में लड़कियों को बेचा जा रहा है, गुलाम बनाया जा रहा है ... राजस्थान में 14 बच्चे प्रतिदिन लापता होते हैं. एक महीने में 400 लड़कियां लापता हो जाती हैं और दुष्कर्म में राजस्थान का नंबर सबसे ऊपर हो रखा है और मुख्यमंत्री इन्हे सब अपराधों को झूठे आंकड़े के कर निकल लेते हैं।

पहले भी गहलोत को ले चुकीं हैं आड़े हाथों

गौरतलब है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने पिछले महीने ही महिला अपराध के 50 फीसदी मामले झूठे होने के बयान देने पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि राजस्थान में जिस तरह की मानसिकता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की है। उसी मानसिकता से राजस्थान पुलिस कार्रवाई करती है। ऐसे में महिला अत्याचार से पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा। इस तरह मामलों को झूठा बताकर अशोक गहलोत अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं। लिहाजा जिस तरह का टालमटोल का रवैया मुख्यमंत्री अपना रहे हैं। उसी तरह का रवैया और माइंडसेट पुलिस का है। इस कारण महिला अत्याचारों से जुड़े प्रकरणों की जांच सही तरीके से नहीं हो रही और महिलाओं के साथ न्याय नहीं हो रहा।

बता दें कि बच्चियों की कथित नीलामी और इनकार करने पर जाति पंचायत अपने तुगलकी फरमान में उनकी मांओं से बलात्कार का फैसला सुनाती हैं। ऐसी प्रचलित कुप्रथाओं व घटनाओं का पता चलते ही राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी)  ने राजस्थान सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है जिसमें यह बताने को कहा है कि महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ चल रही जाति पंचायत व्यवस्था को समाप्त करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है। इसी तरह  पुलिस महानिदेशक से भी पूछा है कि ऐसे अपराधों और उनको नहीं रोक पाने वाले लोक सेवकों पर क्या कार्रवाई की है । एनएचआरसी ने स्वतः संज्ञान लेकर ये आदेश दिया था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।