मोदी मैजिक: 73 साल के पीएम मोदी की 10 बातें जो विपक्ष में मिसिंग हैं
<p>नरेंद्र मोदी 73 वर्ष के हो गए हैं, लेकिन वो आज भी अपने कैडर में ऐसा जोश भर देते हैं, जिसका जवाब नहीं। विपक्ष में ऐसे करिश्माई नेता की भारी कमी है। सवाल है कि आखिर मोदी ऐसा करिश्मा कर पाते हैं तो कैसे? मोदी की शख्सियत के 10 विशेष पहलु हैं, जो उन्हें दूसरों से अलग करते हैं।</p>
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17वीं लोकसभा के समापन सत्र में संसद से ऐलान किया कि उनकी सरकार दूसरी बार सत्ता में लौटने वाली है और वो तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। राजधानी दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में तो पीएम ने यहां तक कह दिया कि देश ही नहीं, विदेशों में भी सबको पता है कि ‘आएंगे तो मोदी ही।’
पीएम मोदी के इस दावे में इसलिए भी दम दिखता है। उनके आलोचक भी मानते हैं कि विपक्ष में कोई भी चेहरा इतना दमदार नहीं जो मोदी का मुकाबला कर सके। तो सवाल उठता है कि आखिर मोदी में ऐसी कौन सी बात है कि विपक्ष उनके सामने बिल्कुल बेचारा दिख रहा है।
1. धैर्य की कमी नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पता है कि सही वक्त पर कदम उठाने से ही सफलता मिल सकती है, अति उत्साह में या उकताकर कोई कदम उठा लेने से नुकसान की आशंका ही पैदा होती है। इस एक सूत्र ने नरेंद्र मोदी न केवल देश-विदेश में बैठे अपने विरोधियों को दशकों से मात देते आ रहे हैं बल्कि अपने फैसलों को विरोधियों की नजरों में भी ‘मास्टर स्ट्रोक’ साबित करते रहे हैं। दूसरी तरफ, असीम धैर्य के कारण मोदी जल्दी इतनी बड़ी गलती नहीं करते कि विरोधियों को उन पर निशाना साधने का मौका मिल जाए। इसका असर यह होता है कि अधीर होकर विरोधी ही गलत कदम उठा लेते हैं। इसका भी फायदा पीएम मोदी को ही मिलता है।
उड़ी में जब आतंकी हमला हुआ तो पीएम मोदी ने अगले ही दिन पाकिस्तान को सबक सिखाने की नहीं सोची बल्कि वक्त का इंतजार किया, अच्छी प्लानिंग की और फिर जो हुआ, उसे दुनिया ने देखा। इसी तरह, 2020 के किसान आंदोलन में कुछ अराजक तत्वों ने लाल किले से तिरंगा झंडा उतारकर, सुरक्षा बलों पर बर्बर हमला करके सरकार को कार्रवाई करने को उकसाया, लेकिन मोदी सरकार ने धैर्य का दामन नहीं छोड़ा। उसने पुलिस को किसानों पर लाठी चार्ज जैसी कार्रवाई करने का आदेश नहीं दिया। उससे पहले सीएए के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन हुआ। दिल्लीवासी ही नहीं, देशभर के लोग उकता गए लेकिन मोदी सरकार ने धैर्य बनाए रखा।
2. तकनीक के दोस्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही 73 वर्ष के हो गए हों, लेकिन वो खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करते हैं जिसे आधुनिकता से परहेज नहीं बल्कि प्रेम है। वो खुद को देश का पहला प्रधानमंत्री बताते हैं, जिसका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ है। मोदी सरकार ने श्डिजिटल इंडियाश् और श्स्टार्टअप इंडियाश् जैसी पहलों की शुरुआत की, जिसने भारत में डिजिटल क्रांति ला दी। आज यूपीआई दुनिया का सबसे सुरक्षित और आसान पेमेंट सिस्टम बन गया है। मोदी सरकार कैशलेस इकॉनमी से लेकर पेपरलेस पार्लियामेंट तक की, अवधारणा पर आगे बढ़ रही है। पीएम मोदी के टेक सेवी होने का ही नतीजा है कि आज देश में दर्जनों फिनटेक कंपनियां खड़ी हो गई हैं, रक्षा क्षेत्र में उन हथियारों और उपकरणों का उत्पादन भारत में ही हो रहा है जिनकी 10 साल पहले कल्पना करना भी शायद संभव नहीं था। पीएम मोदी इस वजह से भी युवा वर्ग में खास अपील है। आज लोगों को बैंक, गैस और पता नहीं, कितनी और जरूरतों के लिए लाइन में लगने से मुक्ति मिल गई है।
3. जनता की नब्ज पर पकड़
विरोधी भी मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जनता की नब्ज पर जबर्दस्त पकड़ है। उन्हें पता होता है कि जनता का मिजाज क्या है, उसकी आशा-आकांक्षा क्या है। उन्होंने आरएसएस कार्यकर्ता के रूप में वर्षों तक देश भ्रमण किया है, जिससे उन्हें जनता के जमीनी समस्याओं की अच्छी समझ है। चुनावी प्रबंधक प्रशांत किशोर ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा भी है कि पीएम मोदी की सबसे बड़ी ताकत ये नहीं है कि वो बहुत अच्छे वक्ता हैं या उनकी छवि बेदाग है बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी मुद्दों की समझ में है। प्रशांत कहते हैं कि पीएम मोदी ने आम जनता के बीच जो वर्षों बिताए, उनसे उनके अंदर मौलिक समझ पैदा हो गई है। पीएम मोदी आज भी आम जनता से जुड़े रहने के लिए अलग-अलग प्लैटफॉर्मों का इस्तेमाल करते हैं। सोशल मीडिया पर वो हैं ही, रेडियो के जरिए भी वो ‘मन की बात’ करते हैं। दरअसल, यह मोदी के मन की बात का कार्यक्रम नहीं बल्कि जनता के मन की बात समझने की तरकीब है। इसी तरह, ‘परीक्षा पे चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों से वो बच्चों के बीच अपनी पैठ बनाते हैं जो भविष्य का मतदाता होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आमजन की आकांक्षा को समझकर ही बीजेपी को ‘ब्राह्मण और बनियों की पार्टी’ वाली छवि से उबार दिया और अब यह पिछड़ों और वंचितों की पार्टी बन गई है। मोदी ने अनटैप्ड वोटर्स के बड़े वर्ग को अपने साथ जोड़ा है जिनमें महिला, पिछड़े, आदिवासी शामिल हैं।
महिलाओं के लिए ‘लखपति दीदी’, ड्रोन दीदी, स्वयं सहायता समूह के जरिए आर्थिक मदद, शौचालय, मुफ्त अनाज जैसी योजनाएं लाई गईं तो मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथा से मुक्ति और संसद एवं विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए कानून लाए गए। मोदी सरकार ने पहले एक दलित रामनाथ कोविंद तो अब एक आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति का सर्वोच्च पद दिया।
4. बड़े फैसले लेने की क्षमता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि एक कड़क नेता की है, जो बड़े और कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकता है। नोटबंदी हो या एयर स्ट्राइक, रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों का अनुकरण करने से इनकार की बात हो या वैश्विक महामारी कोविड-19 के लिए वैक्सीन बनाने का फैसला, मोदी सरकार ने एक के बाद एक कई ऐसे कदम उठाए जिन्होंने खासकर पीएम मोदी की छवि मजबूत की। पीएम कहते भी हैं कि उनका तीसरा कार्यकाल बड़े निर्णयों का होगा। प्रधानमंत्री ने बीजेपी राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा, ‘जो काम सदियों से लटके थे, हमने उनका समाधान करने का साहस करके दिखाया है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण करके हमने 5 सदियों का इंतजार खत्म किया है। गुजरात के पावागढ़ में 500 साल बाद धर्म ध्वजा फहराई गई है। 7 दशक बाद हमने करतारपुर साहिब राहदारी खोली है। 7 दशक के इंतजार के बाद देश को आर्टिकल 370 से मुक्ति मिली है।’ भला कौन सोच सकता था कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 का खात्मा हो जाएगा और पाकिस्तान के अंदर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक किया जाएगा।
5. फेंके गए पत्थर से महल खड़ा करने की क्षमता
प्रधानमंत्री अपने भाषणों में अक्सर कहते हैं कि विरोधी उन पर जितने पत्थर फेंकेंगे, वो उनसे ही महल बना लेंगे। पीएम का यह दावा सच्चाई के धरातल पर भी बिल्कुल खरा उतरता है। याद कीजिए जब नरेंद्र मोदी 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बने तो विश्लेषक बताने लगे कि मोदी को विदेश मामलों का अनुभव तो कतई नहीं है। आज मोदी सरकार जिन विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है, उनमें एक मजबूत विदेश नीति भी है। मोदी ने मुस्लिम देशों के साथ खास दोस्ती गांठी, जिससे हर कोई हैरान है। कतर में जब भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारी जासूसी के आरोप में पकड़े गए और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई तो विरोधी मोदी सरकार पर हमलावर हो गए। लेकिन पीएम मोदी अपने चिरपरिचित अंदाज में शांत रहे और कतर के अमीर से बात कर ली। नतीजा सबके सामने है। सभी आठ नौसैनिक कतर से रिहा होकर भारत लौट चुके हैं जिससे मोदी विरोधियों की सांसें हलक में अटक गई हैं।
6. कुनबा जोड़े रखने की काबिलियत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को उत्तरदायी बनाए रखने के लिए सीईओ की भूमिका निभाई। वो मंत्रियों को एक नामी प्राइवेट कंपनी के सीईओ की तरह टास्क और टारगेट देते हैं और फिर वक्त पर हिसाब मांगते हैं। स्वाभाविक है कि सरकार में आकर मौज करने की परंपरा के आदी रहे नेताओं को यह कम-से-कम शुरुआत में पसंद तो नहीं आया होगा। बावजूद इसके किसी ने हिम्मत नहीं की कि वो पीएम मोदी या पार्टी के खिलाफ बगावत करने की सोचे भी। कई विश्लेषक बीजेपी को भी कांग्रेस प्लस काउ (काउ यानी हिंदुत्व के पुट वाली कांग्रेस) की संज्ञा दे चुके थे। लेकिन आज वो विश्लेषक भी मानेंगे कि आज की बीजेपी कांग्रेस प्लस काउ नहीं बल्कि पार्टी विद डिफरेंस ही है। एक सामान्य मनोविज्ञान है कि काबिल लोगों के लिए किसी की प्रधानता या निर्देशन स्वीकार करना आसान नहीं होता है। बीजेपी या मोदी सरकार में काबिल लोगों की कोई कमी नहीं है, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई मोदी के नेतृत्व को खारिज कर दे।
ऐसा क्यों? क्योंकि मोदी डिलिवर करते हैं। तमाम सर्वे बताते हैं कि पीएम मोदी की लोकप्रियता में कोई बट्टा नहीं लगा है, वो आज भी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। दूसरी तरफ, शरद पवार जैसे दिग्गज की पार्टी एनसीपी बिखर गई। उनके भतीजे अजित पवार ने ही पार्टी का विभाजित कर दिया। महाराष्ट्र में ही उद्धव ठाकरे की शिवसेना बंट गई। लेकिन बीजेपी न केवल एकजुट है बल्कि ज्यादा ताकत और जज्बे से लबालब है। फिर बात सिर्फ बीजेपी ही की नहीं, एनडीए की भी है। एनडीए का कुनबा फिर से बढ़ने लगा।
7. विजनरी लीडर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक छवि विजनरी नेता की भी है। वो दूर की सोचते हैं- बात चाहे पार्टी की हो या देश की। उनके पास देश के लिए एक विजन है। वो कहते हैं कि 2047 तक भारत के एक विकसित राष्ट्र बनेगा और उनके दावे को देश-विदेश के विश्लेषकों से समर्थन हासिल हो रहा है। मोदी के विजन को दुनिया मानती है, जिसका प्रदर्शन कई मौकों पर हो चुका है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर जब कहा कि वक्त युद्ध का नहीं है तो उनके इस बयान को दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं ने दुहराया। पीएम मोदी ने देश के साथ-साथ दुनिया के लिए भी विजन दिया है। बात इंटरनेशनल सोलर अलायंस की हो, नई सप्लाई चेन के निर्माण की हो या ग्लोबल साउथ को आवाज देने की हो, मोदी के विजन को बड़ा समर्थन हासिल हुआ है। देश के विकास को लेकर भी पीएम मोदी का विजन स्पष्ट है। वो योजना बनाते हैं और लागू करने की अवधि भी तय कर देते हैं। कई योजनाएं तो तय वक्त से पहले पूरी हो जाती हैं। यही वजह है कि मोदी स्केल और स्पीड की बात करते हैं। वे कहते हैं कि जो हो भव्य हो और तेज गति से हो। हरियाणा में हाल की रैली में पीएम ने कुछ योजनाओं का शिलान्यास करते हुए दावा किया कि इनका उद्घाटन भी वही करेंगे।
8. बेदाग मजबूत छवि
प्रधानमंत्री मोदी से मुकाबले में ज्यादातर विपक्षी नेताओं के पिछड़ने का सबसे बड़ा पैमाना है- बेदाग छवि। अगर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे गिने-चुने नेताओं को छोड़ दिया जाए तो कोई और नेता भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त नहीं है। मजे की बात है कि ये दोनों ही बीजेपी के समर्थन में हैं। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे। उस दौरान भी उनके दामन पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा था। आज वो 10 वर्षों से प्रधानमंत्री हैं तो भी वो बेदाग हैं। कांग्रेस पार्टी और विशेषकर राहुल गांधी ने राफेल जेट की खरीद में घोटाले के आरोप जोर-शोर से जरूर उठाया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सारे आरोपों को खारिज कर दिया। इसी तरह, उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी में गड़बड़ियों के प्रति मोदी सरकार की नजरें फेरने के आरोप लगाए गए तो सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त समिति ने आरोपों को निराधार बता दिया।
9. राजनीति और शासन का अनुभव
गुजरात में 13 साल के शासन के बाद नरेंद्र मोदी का केंद्र में दूसरा कार्यकाल पूरा होने के कगार पर है। 23 वर्षों से शासन चलाने का उनका अनुभव उन्हें किसी भी विपक्षी नेता से अलग करता है। दिनोंदिन उनका शासन-प्रशासन का अनुभव बढ़ता जा रहा है। चूंकि वो अपने दायित्वों का निर्वहन पूरे चाव से करते हैं, इस कारण वो तेजी से सीखते भी हैं। उन्होंने अपने लंबे अनुभव से ही सीखा है कि राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के नारों से ही जनता उनके साथ नहीं जुड़ी रहेगी, उसके कल्याण के लिए ठोस प्रबंध करने होंगे। फिर बड़ी वंचित आबादी के साथ कोई देश विकास की सीढ़ी कैसे चढ़ सकता है! पीएम मोदी ने अपने अनुभवों को जमीन पर उतारने के लिए न सिर्फ योजनाएं बनाईं बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने के ठोस प्रबंध भी किए। पीएम मोदी ने लाल फीताशाही और नौकरशाही की एक बड़ी बाधा को भी धीरे-धीरे ही सही, खत्म करने की दिशा में कदम उठाए। पीएम ने अपने भाषणों में नौकरशाही की प्रशंसा की और कहा कि इनकी बदौलत ही सरकार के कार्यक्रमों को अमली जामा पहनाने में सफलता मिल रही है।
10. बेजोड़ नेता, शानदार वक्ता
एक वक्त था जब अटल बिहारी वाजपेयी को शानदार वक्ता माना जाता था। आज वो हमारे बीच नहीं हैं। वाजपेयी कवि हृदय थे, मोदी के मन में राजनीति समाई है। अटल के भाषणों को सुनने के लिए लोग खामोश रहते थे, मोदी की बातों पर लोग तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। विरोधियों को भी विश्वास होता है कि संसद में पीएम मोदी बोलेंगे तो पता नहीं कैसे-कैसे वार करेंगे। इसमें कोई शक नहीं कि पीएम मोदी बातों का जादू बिखरने में माहिर हैं। उधर, विपक्ष में ऐसे नेताओं का घोर अभाव है जिनके भाषण का लोगों को इंतजार हो। मोदी अपने भाषण में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हैं तो विपक्ष की कमजोरियां भी उतनी ही शिद्दत से उजागर करते हैं। जनता उनके भाषणों में उम्मीद की किरण देखती है। उधर, विपक्षी नेता मोदी सरकार की आलोचना में शब्दों का संतुलन रख पाने में अक्सर विफल होते हैं।
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