चुनाव अब में नहीं चलेगी झूठी शिकायत ,सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सख्त रवैया 

<p><em><strong>आज गुजरात में प्रथम चरण का चुनाव है। पूर्व में &nbsp;कई बार ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में खराबी की शिकायत कर परिणामो को झुठलाने की कोशिश की जाती रही है। पर अब ऐसा नहीं हो सकेगा क्योकि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में खराबी की झूठी सूचना फैलाने वाले व्यक्ति को परिणाम पता होना चाहिए।</strong></em></p>

चुनाव अब में नहीं चलेगी झूठी शिकायत ,सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सख्त रवैया 
01-12-2022 - 03:56 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

सुप्रीम कोर्ट ने दी चेतावनी
बेंच ने साफतौर पर कहा, ‘‘अगर कोई झूठा बयान देता है, तो उसे परिणाम पता होना चाहिए।.आगे की पूरी चुनावी प्रक्रिया ठप हो जाती है. हमें लगता है कि कुछ सख्त शर्त होनी चाहिए, यानी कौन शिकायत कर रहा है और किसे निर्णय लेना है। इस पर विचार किया जाएगा). अन्यथा व्यवस्था काम नहीं कर पाएगी।’’
49एमए की याचिका पर बेंच का जवाब 
एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव संचालन नियमों का नियम 49एमए असंवैधानिक है क्योंकि यह ईवीएम और मतदान की पर्ची देने वाली मशीन (वीवीपैट) में खराबी की सूचना देने को अपराध बनाता है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने याचिकाकर्ता को लिखित में दाखिल करके यह बताने को कहा कि प्रावधान में क्यों दिक्कत है। पीठ ने कहा, हम आपको बहुत स्पष्ट रूप से बताना चाहते हैं, हमें नियम 49एमए के लिए आपके अनुरोध पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता। आप लिखकर बताइए कि इसमें क्या दिक्कत है। शीर्ष अदालत ने कहा, अगर कोई झूठा बयान देता है, तो उसे परिणाम पता होना चाहिए। आगे की पूरी चुनावी प्रक्रिया ठप हो जाती है। अगर हम पाते हैं कि कुछ शर्त, सख्त शर्त होनी चाहिए- कौन शिकायत कर रहा है और किसे एक निर्णय लेना है, इस पर विचार किया जाएगा। अन्यथा व्यवस्था काम नहीं करेगी।

क्या है नियम 49एमए 
नियम 49एमए के मुताबिक, अगर कोई मतदाता वोट देने के बाद यह आरोप लगाता है कि प्रिंटर से निकली पर्ची में उस उम्मीदवार का नाम या चिह्न है जिसके लिए उसने वोट नहीं दिया था, तो पीठासीन अधिकारी उससे लिखित में लेगा कि अगर आपकी सूचना झूठी निकली तो कार्रवाई होगी। याचिकाकर्ता के मुताबिक, मशीनों की गड़बड़ी के मामलों में जिम्मेदारी मतदाता पर डालना किसी नागरिक को संविधान के तहत मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।