भारत का सुरक्षा कवच हुआ अभेद्य, 5000 किमी दूर से दागी मिसाइल को तबाह कर देगी एडी-1 

<p><em><strong>भारत ने 2000 में एंटी बैलिस्टिक मिसाइल को डीआरडीओ के जरिए विकसित करना शुरू किया गया। ये वो दौर था, जब पाकिस्तान और चीन बैलिस्टिक साजो-सामान तैयार कर रहे थे।</strong></em></p>

भारत का सुरक्षा कवच हुआ अभेद्य, 5000 किमी दूर से दागी मिसाइल को तबाह कर देगी एडी-1 
04-11-2022 - 07:25 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

ओडिशा में 2 नवंबर को फेज-2 की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) इंटरसेप्टर एडी-1 का पहला परीक्षण सफल रहा। डीआरडीओ की ओर से विकसित एडी-1 मिसाइल की खासियत यह है कि यह 5,000 किमी से दागी गई दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाकर उसे नष्ट कर सकती है। साथ ही, यह बैलिस्टिक मिसाइलों और लो फ्लाइंग लड़ाकू विमानों दोनों को नष्ट कर सकती है। इसे भारत के आसमान का सुरक्षा कवच बताया जा रहा है। 
डीआरडीओ चेयरमैन समीर कामत ने कहा, शुरुआत में पहले चरण में 2,000 किमी से आने वाली मिसाइलों को नष्ट करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल विकसित की थी। हमारे दुश्मन लंबी दूरी से निशाना लगाते हैं, तो अब हमारे पास इंटरसेप्ट करने की क्षमता है। एक बार सिस्टम विकसित हो जाने के बाद सरकार अलग-अलग जगहों पर इस मिसाइल की तैनाती पर फैसला करेगी। पूरे बीएमडी सिस्टम में लंबी दूरी के ट्रैकिंग राडार शामिल हैं, जो पनडुब्बी, भूमि आधारित प्रणालियों, हवाई प्लेटफॉर्मों या युद्धपोतों से मिसाइलों के प्रक्षेपण का पता लगा सकते हैं।

क्या है इंटरसेप्टर एडी-1इंटरसेप्टर एडी-1

एक लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल है जो लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और एयरक्राफ्ट को पृथ्वी के वायुमंडल में और उससे बाहर दोनों जगह डिटेक्ट कर सकती है और इसे नष्ट भी कर सकती है। इंटरसेप्टर मिसाइल एक एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल है।

सभी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस शामिल
मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस टेस्ट को करने के लिए देश में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद सभी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के हथियारों का इस्तेमाल किया गया। यह हथियार रणनीतिक लिहाज से देश में अलग-अलग खुफिया स्थानों पर तैनात किया गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये इंटरसेप्टर दो चरणों वाली सॉलिड मोटर द्वारा संचालित है। मिसाइल को टारगेट तक सटीक रूप से मार्गदर्शन करने के लिए इस इंटरसेप्टर में स्वदेशी रूप से विकसित उन्नत नियंत्रण प्रणाली, नेविगेशन है। 
22 सालों की मेहनत का परिणाम
भारत ने 2000 में एंटी बैलिस्टिक मिसाइल को डीआरडीओ के जरिये विकसित करना शुरू किया गया। ये वो दौर था, जब पाकिस्तान और चीन बैलिस्टिक साजो-सामान तैयार कर रहे थे। माना जाता है कि 2010 तक इस फेज को भारत ने हासिल कर लिया। इसी का नतीजा रहा कि भारत ने पृथ्वी मिसाइलों पर आधारित रक्षा कवच तैयार किये। इसके बाद भारत ने दूसरे फेज के एंटी बैलिस्टिक मिसाइल को विकसित करना शुरू किया। ये वैसे मिसाइल थे जो इंटरमीडिएट रेंज के बैलिस्टिक मिसाइलों को ध्वस्त कर सकते हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।