इमरजेंसी के लिए माफी तक ना मांगने वाले लोगों को लोकतंत्र पर बात करने का नैतिक अधिकार नहीः आरएसएस

<p><em>कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से करने और भारत में लोकतंत्र समाप्त होने जैसे बयान देने को लेकर आरएसएस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने हरियाणा में पानीपत के समालखा में हुई आरएसएस की प्रतिनिधि सभा के अंतिम दिन राहुल गांधी का नाम लिये बिना कहा, एक राजनीतिक दल के वरिष्ठ सांसद को अधिक जिम्मेदारी से बात करनी चाहिए और देश में इमरजेंसी के लिए माफी तक ना मांगने वाले लोगों को लोकतंत्र पर बात करने का नैतिक अधिकार नहीं है।</em></p>

इमरजेंसी के लिए माफी तक ना मांगने वाले लोगों को लोकतंत्र पर बात करने का नैतिक अधिकार नहीः आरएसएस
15-03-2023 - 10:34 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

सरकार्यवाह ने बताया कि विजयादशमी 2025 से संघ का शताब्दी वर्ष प्रारंभ हो रहा है किंतु इस प्रतिनिधि सभा में इसके लिए कोई कार्य योजना नहीं बनी है हालांकि कार्य विस्तार तथा कार्य की गुणात्मकता बढ़ाने की योजना अवश्य बनी है। हुई। दत्तात्रेय होसबाले ने महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि संघ आगामी समय में सामाजिक परिवर्तन के पांच आयामों पर अपने कार्य को अधिक केन्द्रित करेगा। इन पांच आयामों में सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण, नागरिक कर्तव्य सम्मिलित हैं। उन्होंने इस विषय में स्पष्ट किया कि समाज में विभेद के विरुद्ध विमर्श खड़ा करना तथा समरसता के लिए निरंतर प्रयास करना इस कार्ययोजना का लक्ष्य है। एक प्रश्न के उत्तर में होसबाले ने कहा कि अस्पृश्यता समाज के लिए पाप और कलंक है तथा संघ इसे मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जनसंख्या असंतुलन पर संघ चिंतित

होसबाले ने कहा कि संघ जनसंख्या असंतुलन के प्रति चिंतित है, जिसका जिक्र समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और महात्मा गांधी भी कर चुके हैं। है। होसबाले ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि संघ का हिन्दू राष्ट्र का विचार सांस्कृतिक राष्ट्र का विचार है, इसे भू-राजनीतिक सीमाओं वाली ‘स्टेट’ की अवधारणा के आधार पर नहीं देखना चाहिए। सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में देखने पर इस विषय में कोई भ्रम नहीं रहता क्योंकि भारत इस रूप में हिन्दू राष्ट्र ही है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि समलैंगिक विवाह के विषय में संघ का स्पष्ट विचार है कि विवाह एक संस्कार है जो स्त्री-पुरुष के बीच होता है, क्योंकि इसका उद्देश्य व्यापक समाज हित है ना कि व्यक्तिगत दैहिक सुख।

संघ शाखाओं की संख्या हुई 68 हजार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि भारत तेजी से आर्थिक विकास कर रहा है, सामरिक और कूटनीति मोर्चों में बढ़ती महत्ता से सभी परिचित हैं। ऐसे समय में भारतीय समाज को एकजुट होकर सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य करना है। होसबोले ने बताया कि बैठक के पहले दिन संघ का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। प्रतिवेदन के अनुसार संघ की शाखाओं की संख्या 62 हजार से बढ़कर 68 हजार तक पहुंची है। आगामी वर्ष में इस संख्या को एक लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। संघ की शाखाओं में तीन महीने में एक परिवार मिलन रखने का भी निर्णय लिया गया है।

शाखा क्षेत्र में होगा सामाजिक सर्वेक्षण

उधर, जयपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि प्रतिनिधि सभा में किये गये फैसले के अनुसार संघ के स्वयंसेवक शाखा क्षेत्र में सामाजिक सर्वेक्षण करेंगे। सर्वेक्षण के आधार पर समाज को साथ जोड़कर समस्याओं का समाधान करेंगे। ऐसे प्रयोग देश भर में शुरू हुए है। राजस्थान में भी ऐसे ही कुछ प्रयोगों की शुरुआत हुई है।

जयपुर में आरएसएस के स्थानीय कार्यालय पर पत्रकार वार्ता को संबोधित करते क्षेत्र संघचालक डॉ रमेश अग्रवाल (दाएं) और प्रांत प्रचार प्रमुख महेंद्र सिंघल

डॉ अग्रवाल ने पानीपत जिले की समालखा में पिछले दिनों संपन्न हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में आए वार्षिक प्रतिवेदन, प्रस्ताव और वक्तव्य के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि बैठक में पारित प्रस्ताव में इस बात पर चिंता जताई कि विश्व की कुछ शक्तियां भारत के 'स्व' आधारित पुनरुत्थान को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। हिंदुत्व के विचार का विरोध करने वाली देश के भीतर और बाहर की अनेक शक्तियां निहित स्वार्थों और भेदों को उभार कर समाज में परस्पर अविश्वास, तंत्र के प्रति अनास्था और अराजकता पैदा करने के लिए षड्यंत्र रच रही हैं। हमें सतर्क रहते हुए उनके मंतव्यों को विफल करना होगा।

सही इतिहास बताया जाना चाहिए

पारित प्रस्ताव में कहा गया कि विदेशी आक्रमणों तथा संघर्ष के काल में भारतीय जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ तथा सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व धार्मिक व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुंची। इन सबके बावजूद लक्ष्य को लेकर भारत के 'स्व' की सुदीर्घ यात्रा प्रेरणास्पद रही है। इस राष्ट्र के नवोत्थान के लिए परिवार संस्था के दृढीकरण, समरस समाज का निर्माण तथा स्वदेशी भाव के साथ उद्यमिता विकास आदि उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विशेष प्रयास करने पर भी बैठक में मंथन हुआ है। देश के अमृतकाल में नैरेटिव बदलने चाहिए, भारत के प्रश्नों पर भारत के ही उत्तर होने चाहिए। विकृत इतिहास के स्थान पर सही इतिहास बताना चाहिए और युगानुकूल रचनाएं होनी चाहिए।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।