राजस्थान: आचार संहिता से पहले बुलेट की रफ्तार से दौड़ रही सरकार... दफ्तरों में छुट्टी पर भी दिन-रात काम
<p><strong>जिन कामों के लिए लोग, कर्मचारी, समाज-संगठन पिछले पांच साल से ज्ञापन, धरने, प्रदर्शन जैसे प्रयास कर रहे थे लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी, उनकी फाइलें ताबड़तोड़ निकाली गईं।</strong></p>
सचिवालय सहित ज्यादातर दफ्तरों में ‘फाइव डे वीक’ व्यवस्था लागू है लेकिन हाल के दिनों में सामने आया कि इनके काम की गति सियासत के मिजाज पर निर्भर करती है। पिछले एक माह से इन दफ्तरों में दिन-रात काम हो रहा है। ‘एवरी ड,े वर्किंग डे’ की तर्ज पर छुट्टी के दिन भी खुल रहे इन दफ्तरों में फाइलें इस गति से दौड़ रही हैं, जैसे बंदूक से निकली गोली। जिन कामों के लिए लोग, कर्मचारी, समाज-संगठन पिछले पांच साल से ज्ञापन, धरने, प्रदर्शन जैसे प्रयास कर रहे थे लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी, उनकी फाइलें ताबड़तोड़ निकाली गईं।
इसके पीछे कारण सिर्फ एक है- कहीं चुनाव आचार संहिता न लग जाए। कर्मचारियों के प्रमोशन और अलग निदेशालय की मांग वाली फाइल एक ही दिन में विभागों से होती हुई सीएम तक पहुंची और साइन होने के साथ ही आदेश जारी हो गए। जिन फाइलों में आपत्तियां दर्ज थीं, उन्हें भी आनन-फानन दूर कर लिया गया। और तो और, 3 नए जिलों की घोषणा भी कर दी गई।
12700 करोड़ के विकास कार्यों का एक साथ शिलान्यास और लोकार्पण
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 12700 करोड़ रुपए लागत के विकास कार्यों का एक साथ शिलान्यास और लोकार्पण किया। विजन-2030 डॉक्यूमेंट लॉन्च करते हुए शिक्षा, पीडब्लूडी, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, जल संसाधन विभाग से जुड़े विकास कार्यों की रूपरेखा रखी। इनमें चिकित्सा विभाग के 1155 करोड़, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी के 4884 करोड़, सार्वजनिक निर्माण विभाग के 1328 करोड़, जल संसाधन के 5388 करोड़ के काम शामिल हैं।
विश्वविद्यालय: दो साल से भर्तियां अटकी थी, 15 दिन में आवेदन लेकर निकाल दी
सितंबर महीने के अंतिम सप्ताह में महाराजा सूरजमल बृज यूनिवर्सिटी ने 46, आरयूएचएस ने असिस्टेंट प्रोफेसर के 74, एग्रीकल्चर विवि जोबनेर ने 164, एग्रीकल्चर विवि कोटा ने नॉन टीचिंग के 44, एग्रीकल्चर विवि बीकानेर ने असिस्टेंट प्रोफेसर, लाइब्रेरियन व अन्य के 70 पदों पर भर्तियां निकालीं। इनके लिए डेढ़-दो साल से मांग की जा रही थी।
अब महज पंद्रह दिन का समय देकर आवेदन ले लिए। आनन-फानन वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति भी प्राप्त कर ली। इसलिए कि आवेदन प्रक्रिया पूरी हो जाए तो आचार संहिता में भी प्रक्रिया चलती रहे।
कर्मचारी: 11 साल से मांगें लंबित थी, सप्ताहभर में बैठकें, फाइल वित्त से सीएमओ तक मंजूरी
मंत्रालयिक कर्मचारी निदेशालय को मंजूरी काम बुलेट रफ्तार से हुआ है। प्रदेश में बोर्ड, निगमों को मिलाकर करीब 1 लाख मंत्रालयिक कर्मचारी हैं। ये पिछले 10 साल से मंत्रालयिक कर्मचारी निदेशालय बनवाने की मांग कर रहे थे।
आचार संहिता पास आते ही सप्ताहभर में फाइनेंस एसीएस, डीओपी सचिव से कर्मचारियों के बीच वार्ताएं हुई। वित्त विभाग की आपत्तियां दो दिन में ही दूर कर ली गईं और मंजूरी दे दी गई। मंत्रालयिक कर्मचारी नेता मनोज सक्सेना कहते हैं, सरकार से एक सप्ताह पहले इसका इशारा मिल गया था।
समाज: तहसील से राज्य स्तर तक चले समाजों के आंदोलन, अब आचार संहिता से पहले तोहफा
जयपुर में 29, जोधपुर 44, उदयपुर 27, कोटा 21, बाड़मेर 18, बीकानेर 12, भीलवाड़ा 10, भरतपुर 9, अजमेर 8 सहित अन्य जिलों में समाजों को भूमि आवंटन।
पहले प्रदेश में आरक्षण, जमीन सहित अन्य मांगों को लेकर पिछले 5 साल में विभिन्न समाजों ने तहसील स्तर से लेकर राज्य स्तर तक आंदोलन किए। इसके तहत 200 से ज्यादा धरने दिए, प्रदर्शन कर अपनी शक्ति दिखाई।
अब सरकार ने अब ताबड़तोड़ फैसले किए। समाजों को साधने के लिए एकसाथ 200 समाज और संस्थाओं को रियायती दर (आरक्षित दर की 10 प्रतिशत) पर जमीन आवंटित कर दी। आचार संहिता के दिन टले तो दो दिन में कुछ और फाइलें क्लीयर होने की संभावना है।
हाथी सवारी: विधायक ने अफसर-मंत्री-सीएमओ के चक्कर काटे, बढ़वा दी दर
जयपुर में हाथी गांव के करीब 100 हाथियों की सवारी का शुल्क बढ़ाने की मांग दो-तीन साल से चल रही थी। हाथी मालिक और महावत दबाव बनाए हुए थे। अब हाल ही हाथियों के मरने और बीमार होने की घटना ने तूल पकड़ा। हाथी मालिकों ने विधायक रफीक खान पर दबाव बढ़ा दिया। पिछली तीन अक्टूबर से विधायक ने वन विभाग से सीएमओ तक लगातार भाग-दौड़ की। इसके बाद चार-पांच अक्टूबर को बैठक कराई। इसी दिन मिनिट्स निकाले, दरें बढ़वा दीं। बोले- क्षेत्र का मामला है।
भर्ती/स्थाईकरण: 10528 संविदाकर्मियों का नियमितीकरण, 15 दिन में 10 हजार भर्तियां
प्रदेश के संविदाकर्मी पिछले 5 साल से मांग कर रहे थे कि उनका स्थाईकरण किया जाए। वहीं, स्कूलों के कंम्प्यूटर अनुदेशकों की तर्ज पर मदरसों में भी कंम्प्यूटर अनुदेशक लगाने की मांग लगातार की जा रही थी। अब पंद्रह दिन में सरकार ने गजब की तेजी दिखाई। 6843 मदरसा अनुदेशकों की भर्ती का प्रस्ताव न केवल स्वीकार कर लिया बल्कि विज्ञापन भी जारी करवा दिया। पहले 2700 पदों पर वित्त विभाग ने कटौती कर दी थी, लेकिन बाद में पूरे पद स्वीकार कर लिए गए।
झोटवाड़ा आरओबी: 15 दिन चैबीसों घंटे काम चला, 4 दिन में आधे का ही लोकार्पण
जयपुर में झोटवाड़ा आरओबी का शिलान्यास 2018 में हुआ। पंद्रह साल से जनता जाम से परेशान थी लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। काम 3 साल तक कछुआ गति से चला। कई बार सवाल उठे। महीनेभर पहले जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को ऊपर के स्तर से संदेश मिला कि झोटवाड़ा आरओबी के काम को जल्दी खींचें। इस पर पंद्रह दिन पहले दिन-रात तेजी से काम चला। 2 अक्टूबर को अधूरे आरओबी का ही लोकार्पण किया जाना था लेकिन अधूरे का काम भी अधूरा ही रहा। आखिर 4 दिन में रंग-रोगन आदि पूरा कर 6 अक्टूबर को 1540 मीटर का पहला फेज खोल दिया गया। पूरा काम 2280 मीटर लंबा होना है।
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