डिटेंशन सेंटर में ही रहेंगे रोहिंग्या, फ्लैट देने की बात खारिज !
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दिल्ली में अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों को घर दिए जाने की खबरों को गृह मंत्रालय ने सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने बुधवार, 16 अगस्त को साफ कहा कि हमने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया है कि अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों को दिल्ली में फ्लैट्स दिए जाएंगे। दरअसल, बुधवार को ही केंद्रीय आवास मंत्री हरदीप पुरी ने ट्वीट कर फ्लैट्स दिए जाने की बात कही थी।
डिपोर्टेशन तक डिटेंशन सेंटर में ही रहेंगे
गृह मंत्रालय ने कहा, दिल्ली सरकार ने हमें प्रपोजल दिया था कि रोहिंग्या मुस्लिमों को नई लोकेशन पर शिफ्ट किया जाए। लेकिन, हमने उन्हें निर्देश दिया कि अवैध रोहिंग्या को अभी वहीं रखा जाए, जहां वे हैं।
हरदीप पुरी ने फ्लैट देने की बात कही थी
केंद्रीय शहरी विकास और आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को ट्वीट किया कि भारत ने हमेशा शरण मांगने वालों का स्वागत किया है। एक ऐतिहासिक फैसले में तय किया गया है कि रोहिंग्या शरणार्थियों को फ्लैट्स में शिफ्ट किया जाएगा। उन्हें बेसिक सुविधाएं दी जाएंगी और 24 घंटे सुरक्षा भी दी जाएगी। इसके कुछ घंटे बाद गृह मंत्रालय ने भी ट्वीट किया और कहा कि ऐसा कोई आदेश नहीं है।
हर महीने टेंट का किराया 7 लाख रुपये
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली में रोहिंग्याओं के सिर पर छत बनाने को लेकर फैसला जुलाई में हुई हाई लेवल मीटिंग के बाद लिया गया। इस बैठक में इस बात पर जोर दिया गया था कि दिल्ली सरकार, मदनपुर खादर इलाके में रोहिंग्याओं के टेंट के लिए लगभग 7 लाख रुपये हर माह का किराया दे रही है।
विश्व हिंदू परिषद ने जताई थी नाराजगी
हालांकि इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी रोहिंग्या मुसलमानों को दिल्ली में घर देने के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई थी। विहिप के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने एक पत्र जारी करके कहा था कि सरकार इस पर फिर से विचार करे। उन्हें घर देने के बजाय भारत से बाहर भेजा जाए।
कौन हैं रोंहिग्या मुस्लिम?
रोहिंग्या एक स्टेटलेस या राज्यविहीन जातीय समूह हैं। ये इस्लाम को मानते हैं और म्यांमार के रखाइन प्रांत से आते हैं। 1982 में बौद्ध बहुल देश म्यांमार ने रोहिंग्या की नागरिकता छीन ली थी। इससे उन्हें शिक्षा, सरकारी नौकरी समेत कई अधिकारों से अलग कर दिया गया।
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