ईरान में हिजाब न पहनने वाली महिलाओं को ट्रेस करने और चेतावनी देने के लिए अब स्मार्ट कैमरों की रहेगी नज़र
<p>ईरान में हिजाब कानून को रोकने के लिए वहां की सरकार ने अब एक नयी कवायत शुरू कर दी है। अब ईरान की सार्वजानिक जगहों पर कमरे लगाए जायेंगे जिससे हिजाब के बिना घूमने वाली महिलाओं का पता लगाया जा सके । पुलिस के अनुसार सिर न ढंकने वाली महिलाओं को "इसका परिणाम भुगतने की चेतावनी वाला टेक्स्ट मेसेज भेजा जाएगा"। सरकार के इस कदम से "हिजाब क़ानून के विरोध को रोकने में मदद मिलेगी"। </p>
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने इस बारे में पुलिस का बयान छापा है। जिसके अनुसार प्रशासन ने हिजाब क़ानून के उल्लंघन के मामलों का पता लगाने और नियम तोड़ने वालों को चेतावनी भरा मेसेज भेजने के लिए कथित तौर पर "स्मार्ट कैमरा" लगाए हैं और इसके लिए अन्य उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद बढे उग्र प्रदर्शन
बता दें कि पिछले साल सितम्बर में ईरान में महसा अमीनी को कथित तौर पर हिजाब क़ानून का उल्लंघन करने के लिए ईरान की मोरैलिटी पुलिस ने गिरफ़्तार किया।पुलिस की हिरासत में उनकी मौत हो गई थी जिसके बाद पूरे देश में हिजाब विरोधी में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। ये विरोध प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए थे।
महसा अमीनी की मौत के बाद ही ईरान में हिजाब का विरोध करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ने लगी। गिरफ़्तारी के जोखिम के बावजूद बड़े शहरों में भी औरतों ने हिजाब पहनने से मना किया। इसके बाद दिसंबर 2022 में ईरान के प्रॉसिक्यूटर जनरल ने धार्मिक पुलिस यानी मोरैलिटी पुलिस को भंग करने की घोषणा की। हालांकि उस वक्त ईरान की क़ानून लागू करने वाली संस्था द्वारा पुष्टि नहीं कि गयी थी।
कट्टरपंथी नेताओं की और अधिक सख्ती की मांग
शनिवार को जारी पुलिस के बयान में हिजाब को "ईरान राष्ट्र की सभ्यता की नींव" के रूप में वर्णित किया गया है। साथ ही व्यापारियों से आग्रह किया गया है कि वो "कड़ी निगरानी" के ज़रिए इन नियमों का पालन करवाएं। ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हज़ारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया है। दिसंबर से अब तक यहां चार लोगों को मौत की सज़ा भी दी गई है। लेकिन देश के कट्टरपंथी नेता अभी भी इस क़ानून को लागू करवाने के लिए और ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। बीते शनिवार, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने एक बार फिर ये दोहराया कि देश की महिलाओं का हिजाब पहनना धार्मिक रूप से ज़रूरी है।
ज्यूडशरी चीफ़ के अनुसार ये सही तरीका नहीं
हालांकि, ईरान के ज्यूडशरी चीफ़ ग़ुलामहुसैन मोहसेनी-इजी ने बीते शुक्रवार चेतावनी भरे अंदाज़ में ये कहा था कि व्यापक स्तर पर की जा रही कार्रवाई महिलाओं को हिजाब पहनने के लिए प्रोत्साहित करने का सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा था, "सांस्कृतिक समस्याओं का हल सांस्कृतिक ज़रिए से ही किया जा सकता है... अगर हम गिरफ़्तारी, जेल की सज़ा देकर इस तरह की समस्या सुलझाना चाहते हैं, तो इसकी कीमत बढ़ेगी और हमें वो प्रभाव भी नहीं देखने को मिलेगा, जो हम चाहते हैं "
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