‘आप’ सरकार की सुप्रीम जीत: केजरीवाल को मिला पोस्टिंग और ट्रांसफर का हक
<p><em><strong>सर्वोच्च अदालत ने फैसला दिया है कि अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर का हक दिल्ली सरकार को है। दिल्ली में सभी प्रशासनिक मामलों से सुपरविजन का अधिकार उपराज्यपाल के पास नहीं हो सकता। </strong></em></p>
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने गुरुवार को दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार के पास होना चाहिए। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इस मामले में सर्वसम्मति से फैसला सुनाया है।
पांच जजों की पीठ का फैसला
पांच जजों की इस संवैधानिक पीठ में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल थे। पीठ ने कहा कि दिल्ली में सभी प्रशासनिक मामलों से सुपरविजन का अधिकार उपराज्यपाल के पास नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार के हर अधिकार में उपराज्यपाल का दखल नहीं हो सकता।
लोकतांत्रिक सरकार को मिले अधिकार
पीठ ने कहा, अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर का अधिकार लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के पास होता है। भूमि, लोक व्यवस्था और पुलिस को छोड़कर सर्विस से जुड़े सभी फैसले, आईएएस अधिकारियों की पोस्टिंग (भले ही दिल्ली सरकार ने किया हो या नहीं) उनके तबादले के अधिकार दिल्ली सरकार के पास ही होंगे।’
क्या बोले केजरीवाल
इस फैसले पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है, ‘आठ सालों से हमारे हर काम को केंद्र सरकार ने इस नियम के जरिए रोका। शिक्षा में काम करना चाहा तो ऐसा सचिव नियुक्त किया, जो काम में अड़गा लगाया। मोहल्ला क्लीनिक के लिए ऐसा स्वास्थ्य सचिव चुना जो काम ना होने दिया। मेरे हाथ बांध कर मुझे नदी में फेंक दिया गया था। लेकिन आपका यकीन था और हमारी लगन से हमने काम करना जारी रखा। आज मैं चीफ जस्टिस और बेंच में शामिल चार अन्य जजों का शुक्रिया अदा करता हूं। ये लोकतंत्र की जीत है, सत्य की जीत है।
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