आसान नहीं भारत में चीतों की राह, इन देसी लड़ाकों से लेना होगा पंगा
अफ्रीकी देश नामीबिया से हवाई जहाज में बैठाकर लाये गये आठ चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के नये माहौल में ढलने की कोशिश कर रहे हैं। चीते आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते और इन्हें इंसानों से दूर रहना ही अच्छा लगता है। ऐसे में इन पर निगरानी के लिए भी विशेष इंतजाम किये गये हैं। लेकिन, यहां इन चीतों की राह और जिंदगी आसान नहीं होने वाली।
एक रिपोर्ट के अनुसार हर 100 वर्ग किलोमीटर पर वहां करीब 9 तेंदुए हो सकते हैं। ऐसे में अफ्रीका से आये इन विदेशी मेहमानों यानी चीतों का इन तेंदुओं से संघर्ष हो सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर इस तरह की लड़ाई होती है तो चीते को जोखिम ज्यादा है क्योंकि तुलनात्मक रूप से तेंदुए ज्यादा शक्तिशाली होते हैं। हालांकि यह भी सच है कि तेंदुए और चीते साथ-साथ जंगल में रहते आ रहे हैं।
खतरा तो शेर से भी है लेकिन...
चीतों को खतरा तो शेर से भी होता है लेकिन भारत में इस समय शेर केवल गुजरात में हैं। उन्हें कूनो लाने पर मंथन चल रहा है। आने वाले समय में साथ-साथ रहने का ईकोसिस्टम विकसित करने के लिए सरकार कूनो पार्क में बाघ, शेर, चीता और तेंदुआ सबको रखने पर विचार-विमर्श कर रही है।
चीता स्पोर्ट्स कार तो तेंदुआ टैंक है!
ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण है कि अगर तेंदुआ और चीते की फाइट होती है तो कौन किस पर भारी पड़ेगा। अगर चीता बहुत बड़ा है और तेंदुआ देखने में छोटा हो तो भी चीते के पास वो आक्रामकता नहीं होती है, जो तेंदुए के पास है। वैसे, ज्यादातर जगहों पर पाए जाने वाले तेंदुए चीते से बहुत बड़े होते हैं। एक एक्सपर्ट के शब्दों में अगर चीता स्पोर्ट्स कार है तो तेंदुआ टैंक है। सीधी फाइट होती है तो टैंक ही जीतेगा।
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