पुराने जूतों को नया बनाकर गरीब बच्चों को कर देते हैं दान... इन दोस्तों का आइडिया है सुपरहिट

<p><em><strong>श्रीयांस भंडारी और रमेश धामी ने दिसंबर 2013 में ग्रीन सोल की शुरुआत की थी। यह पुराने जूतों को अपसाइकिल करती है। इसका एक मकसद गरीब बच्चों को आरामदायक जूते दिलाना भी है।</strong></em></p>

पुराने जूतों को नया बनाकर गरीब बच्चों को कर देते हैं दान... इन दोस्तों का आइडिया है सुपरहिट
29-10-2023 - 12:06 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

श्रीयांस भंडारी और रमेश धामी पेशेवर एथलीट रहे हैं। अपने करियर के दौरान अक्सर हर साल वो कई जोड़ी जूते पहनते और बदलते थे। एक दिन जब रमेश ने अपने पुराने जूतों की एक जोड़ी को चप्पल में बदल दिया तो दोनों को लगा कि वो अपनी सभी जोड़ियों के साथ ऐसा कर सकते हैं। यह दोनों एथलीट के लिए वेक-अप कॉल था। 
ग्रीनसोल नाम का संगठन शुरू किया
दिसंबर 2013 में उन्होंने ग्रीनसोल नाम का एक संगठन शुरू किया। पुराने जूतों को नए ट्रेंडी जूतों में बदलने की सोच के साथ इसका गठन किया गया था। शुरुआत में श्रीयांस और रमेश ने सोचा कि वो उन जूतों का दोबारा व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए रखेंगे। लेकिन यह आइडिया सोशल बिजनस वेंचर में बदल गया। उन्होंने गरीब बच्चों को नवीनीकृत जूते देकर उनकी मदद करने का फैसला किया।
एक प्रोसेस से गुजरते हैं फेंके गए जूते 
फेंके गए जूतों को अपसाइकिल करने के लिए उन्हें एक प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसमें उन्हें धोना, सोल और ऊपरी हिस्से को अलग करना और जरूरी आकार के अनुसार उन्हें काटना शामिल है। कई निर्माताओं के उलट जूतों को पिघलाने के बजाय वे उन्हें रिफर्बिश करते हैं ताकि कम से कम कार्बन उत्सर्जन हो।
जूतों के डिजाइन की सराहना 
दोनों को उनके टिकाऊ डिजाइन के लिए भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद से भी सराहना मिल चुकी है। पुराने जूतों को अपसाइकिल करके दोनों गरीब बच्चों को इन्हें डोनेट करते हैं। ये जूते हर मामले में खरे होते हैं। इन्हें अपसाइकिल करने में आराम पर खास ध्यान दिया जाता है।
ऐसे कलेक्ट करते हैं पुराने जूते 
देशभर में अपने अभियान के जरिये वो पुराने जूतों का कलेक्शन करते हैं। फिर अलग-अलग गांवों में बच्चों को दान करने से पहले उन्हें अपसाइकिल करते हैं। वो उन स्थानों पर जूते पहनने के फायदों के बारे में जागरूकता अभियान भी चलाते हैं जहां जूते दान करने जाते हैं। वो यह सुनिश्चित करते हैं कि बच्चे नंगे पैर स्कूल न जाएं। उन्हें चप्पल पहने, दौड़ते- खेलते हुए बच्चों को देखना बहुत अच्छा लगता है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।