आज एकादशी का है एक अलग ही महत्त्व, इसलिए ज़रूर करें भगवान विष्णु के इस मन्त्र का जाप 

<p>हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। वैसे तो हर माह में दो एकादशी तिथि आती है, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में, लेकिन पापांकुशा एकादशी का अलग ही महत्व होता है। इस व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने से श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को कभी धन-दौलत, सुख, सौभाग्य की कमी नहीं होने देते।&nbsp;</p>

आज एकादशी का है एक अलग ही महत्त्व, इसलिए ज़रूर करें भगवान विष्णु के इस मन्त्र का जाप 
25-10-2023 - 11:46 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

माना जाता है  कि इस व्रत को करने से सभी पाप नष्ट होते हैं। व्यक्ति इस लोक के सुखों को भोगते हुए मोक्ष को प्राप्त करता है। जानिए पापांकुशा एकादशी व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि...

पापांकुशा एकादशी तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार पापांकुशा एकादशी 25 अक्तूबर, दिन बुधवार को है। इस तिथि की शुरुआत 24 अक्तूबर को दोपहर 3 : 14  से हो रही है। अगले दिन 25 अक्तूबर को दोपहर 12 : 32 मिनट पर इसका समापन होगा। परन्तु उदया तिथि 25 अक्तूबर को है, इसलिए पापांकुशा एकादशी का व्रत 25 अक्तूबर को ही रखा जाएगा।

इन मन्त्रों का करें जाप 

आज दिनभर भगवान् विष्णु का दिन भर स्मरण करें और नीचे दिए हुए किसी भी मन्त्र का जाप करते रहे 

एकादशी व्रत के मंत्र

1. ॐ विष्णवे नम:

2. ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि ।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

3. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

 महत्व
 इस एकादशी के व्रत से पापों का प्रायश्चित होता है और साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पूरी श्रद्धा के साथ पापाकुंशा एकादशी के दिन व्रत रखकर पूजा करने से मन पवित्र होता है। साथ ही मनुष्य में सद्गुणों का समावेश होता है।इस तरह  श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को कभी धन-दौलत, सुख, सौभाग्य की कमी नहीं होने देते। 

पापाकुंशा एकादशी कथा
प्राचीन काल में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक क्रूर बहेलिया रहता था। क्रोधन ने अपनी पूरी जिंदगी गलत कार्य जैसे हिंसा, मद्यपान, आदि में व्यतीत कर दी थी। जब उसके जीवन का अंतिम समय आया तब यमराज ने दूतों को क्रोधन को लाने को भेजा। यमदूतों ने क्रोधन को इस बात की जानकारी दे दी कि कल उसके जीवन का अंतिम दिन होगा। मृत्यु के भय से डरकर क्रोधन महर्षि अंगिरा की शरण में पहुंच गया। महर्षि ने क्रोधन की दशा को देखकर उस पर दया की और उसे पापाकुंशा एकादशी का व्रत करने को कहा। इस व्रत के करने से क्रोधन के सभी पाप नष्ट हो गए और भगवान की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति हुई।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।