मथुरा शाही ईदगाह विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई मार्च तक टाली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका पर सुनवाई मार्च 2025 तक के लिए टाल दी। यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें मस्जिद समिति की याचिका खारिज कर दी गई थी।
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिका पर सुनवाई मार्च 2025 तक के लिए टाल दी। यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें मस्जिद समिति की याचिका खारिज कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय कुमार की खंडपीठ ने कहा, "हम आज एक अन्य मामले की सुनवाई कर रहे हैं। याचिका को मार्च 2025 में सूचीबद्ध किया जाए।"
मामले का पृष्ठभूमि
इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश:
- 1 अगस्त, 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी थी।
- अदालत ने कहा कि शाही ईदगाह की "धार्मिक पहचान" का निर्धारण आवश्यक है।
- हिंदू पक्ष का दावा:
- विवादित स्थल पर बना औरंगजेब काल का शाही ईदगाह मस्जिद एक मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।
- हिंदू पक्ष ने मस्जिद को "हटाने" की मांग की है।
- मस्जिद समिति का पक्ष:
- मस्जिद प्रबंधन समिति का कहना है कि हिंदू पक्ष की याचिकाएं 1991 के उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम का उल्लंघन हैं।
- इस अधिनियम के तहत किसी धार्मिक स्थल के चरित्र को बदलने पर रोक है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का विचार
- अदालत ने कहा कि 1991 अधिनियम में "धार्मिक चरित्र" की परिभाषा नहीं दी गई है।
- विवादित स्थल का धार्मिक चरित्र 15 अगस्त, 1947 को मौजूद स्थिति के आधार पर तय किया जाएगा।
- अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ये मामले वक्फ अधिनियम, 1995 और अन्य कानूनी प्रावधानों से बाधित नहीं हैं।
कानूनी पहलू
- मस्जिद प्रबंधन समिति और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने तर्क दिया कि ये मुकदमे उपासना स्थल अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत अमान्य हैं।
- हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के उस आदेश पर लगी रोक हटाने की अपील करेंगे, जिसमें मस्जिद के सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी।
मथुरा विवाद और वाराणसी विवाद
- यह मामला वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर विवाद की तरह है, जहां दोनों धार्मिक स्थल एक-दूसरे के बगल में स्थित हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने के साथ, विवादित स्थल की धार्मिक पहचान का निर्धारण और कानूनी प्रक्रिया में फिलहाल देरी जारी रहेगी। यह मामला न केवल ऐतिहासिक, बल्कि राजनीतिक और धार्मिक रूप से भी संवेदनशील है।
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