Chaitra Navratri Day 7 : मां कालरात्रि दिलाती हैं हर तरह के संकटों और शत्रुओं से मुक्ति, आज दिन भर करें देवी मां का स्मरण..
<p><strong>Maa Kalratri Puja Vidhi and Mantra : </strong>दैत्यों और दुष्टों का संहार करने वाली माता कालरात्रि की आज नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर पूजा की जाती है । मां का सातवां स्वरुप साहस की देवी के नाम से भी जाना जाता है।मान्यता है कि मां कालरात्रि की सच्चे मन से पूजा करने पर मां अपने भक्तों को संकटों से छुटकारा दिलाती हैं। भक्त को शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। महासप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती के बारे में जानते हैं..</p> <p><img alt="" src="https://www.newsthikana.com/uploads/news/1679984327kaalratri.jpg" style="height:450px; width:800px" /></p> <p>नवरात्र के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा</p>
माँ कालरात्रि का स्वरुप
मां कालरात्रि के स्वरूप की बात करें तो उनका वर्ण अंधकार की तरह एकदम काला है। विशाल केश और चार भुजाओं वाली माता का स्वरूप अर्द्धनारीशवर शिव की तांडव मुद्रा में नजर आती हैं।
मां कालरात्रि की कथा
जब शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज जैसे राक्षसों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा रखा था, तब सभी देवता इससे चिंतित होकर शिवजी के शरण में गए और उनसे सृष्टि की रक्षा के लिए प्रार्थना करने लगे। भगवान शिव ने माता पार्वती को भक्तों की रक्षा के लिए दैत्य का वध करने को कहा। शिवजी की बात मानकर माता ने दुर्गा का रूप धारण कर शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया। जब मां दुर्गा ने रक्तबीज दानव को मौत के घाट उतारा, तो दैत्य के शरीर से निकले रक्त से लाखों की संख्या में रक्तबीज दैत्य उत्पन्न हो गए। यह देख मां दुर्गा ने अपने तेज से कालरात्रि को उत्पन्न किया। फिर, मां दुर्गा ने दैत्य रक्तबीज का वध किया और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को जमीन पर गिरने से पहले ही माता ने अपने मुख में भर लिया। इस तरह मां दुर्गा ने दैत्यराज के सभी रूपों का गला काटते हुए वध कर दिया।
मां कालरात्रि के पूजा मंत्र
-क्लीं ऐं श्रीं कालिकायै नम:।
ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:।
मां कालरात्रि प्रिय भोग
मां कालरात्रि का प्रिय भोग गुड़ और शहद माना गया है। ऐसे में नवरात्रि के सातवें दिन की देवी को शहद का भोग अवश्य लगाएं। इससे मां की प्रसन्नता जल्दी हासिल होती है।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
शास्त्रों के अनुसार, मां कालरात्रि की दो तरह से पूजा की जाती है। एक तंत्र-मंत्र और दूसरा शास्त्रीय पूजन के तरीके से। कहते हैं, मां कालरात्रि की पूजा गृहस्थ लोगों को शास्त्रीय विधि के अनुसार करनी चाहिए। तो चलिए इसकी पूरी विधि को जान लेते हैं।इसके लिए सबसे सुबह जल्दी उठ कर स्नान कर लें। फिर अपने पूजा घर की साफ सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव कर लें। माता को नीला रंग अति प्रिय है। इसलिए उनकी पूजा के लिए नीले रंग का इस्तेमाल करना जरूरी है। मां कालरात्रि को गुड़ का भोग जरूर लगाएं। देवी के पूजन में घी का दीपक जलाएं। फिर, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। पूजा के बाद कथा करके देवी की आरती अवश्य करें।
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