‘केवल हानि, कोई लाभ नहीं’: ट्रंप के टैरिफ अराजकता के बीच भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस का हमला

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे भारत के लिए “ऑल पेन, नो गेन” (केवल हानि, कोई लाभ नहीं) वाला करार बताते हुए कहा कि सरकार इसे कूटनीतिक “मास्टरस्ट्रोक” के रूप में पेश कर रही है, जबकि हकीकत में इससे भारत पर भारी टैरिफ..

‘केवल हानि, कोई लाभ नहीं’: ट्रंप के टैरिफ अराजकता के बीच भारत–अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस का हमला
22-02-2026 - 12:03 PM

नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे भारत के लिए “ऑल पेन, नो गेन” (केवल हानि, कोई लाभ नहीं) वाला करार बताते हुए कहा कि सरकार इसे कूटनीतिक “मास्टरस्ट्रोक” के रूप में पेश कर रही है, जबकि हकीकत में इससे भारत पर भारी टैरिफ बोझ पड़ा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए खेड़ा ने दावा किया कि इस समझौते के चलते भारत पर प्रभावी रूप से 18.4% का टैरिफ बोझ आ गया है। उन्होंने लिखा, “सारे ‘मास्टरस्ट्रोक’ के दावों और शोर-शराबे के बाद, भारत एक बार फिर 18.4% के प्रभावी टैरिफ बोझ के साथ खड़ा है—15% प्लस 3.4% औसत MFN दर।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह नतीजा वॉशिंगटन को जरूरत से ज्यादा रियायतें देने का परिणाम है।

खेड़ा के मुताबिक, भारत ने 6 फरवरी को इस अंतरिम समझौते पर जल्दबाज़ी में हस्ताक्षर किए, ताकि रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% के दंडात्मक टैरिफ को घटाकर करीब 18% किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस व्यवस्था को रणनीतिक जीत के तौर पर पेश किया, लेकिन अमेरिका में बाद में हुए कानूनी घटनाक्रमों ने इस दावे की पोल खोल दी। खेड़ा ने इसे “इतनी मशक्कत, लेकिन हासिल कुछ नहींबताते हुए कहा कि ब्राज़ील जैसे देश, जिन्होंने वॉशिंगटन के साथ जल्द बातचीत से परहेज़ किया, अब सही साबित हो रहे हैं।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला समीकरण

यह आलोचना अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया गया। अदालत ने कहा कि International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत आपात आर्थिक शक्तियों का उपयोग राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर था।

इस फैसले के बाद, सैद्धांतिक रूप से कई देशों के लिए न्यूनतम कानूनी टैरिफ Most Favoured Nation (MFN) दर पर लौटकर करीब 3.4–3.5% रह गया। खेड़ा ने तर्क दिया कि अंतरिम समझौते के तहत पहले ही 18% के पारस्परिक टैरिफ पर सहमत होकर भारत ने खुद को ज़रूरत से कहीं ज़्यादा ऊंचे टैरिफ बोझ में बांध लिया है।

इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ट्रंप का नया वैश्विक टैरिफ ऐलान

इसी बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन पहले घोषित 10% वैश्विक टैरिफ को कार्यकारी अधिकारों के तहत “पूरी तरह अनुमत और कानूनी रूप से परखे गए” 15% स्तर तक बढ़ाएगा।

Truth Social पर एक पोस्ट में ट्रंप ने अदालत के फैसले को “बेतुका” और “अमेरिका-विरोधी” बताया। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन Trade Act of 1974 की धारा 122 के प्रावधानों का उपयोग करते हुए टैरिफ जारी रखेगा, जिसके तहत भुगतान संतुलन (Balance of Payments) से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए 150 दिनों तक 15% तक का अस्थायी आयात अधिभार लगाया जा सकता है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले महीनों में उनकी व्यापक आर्थिक नीति के तहत संशोधित टैरिफ उपाय लागू किए जाएंगे।

विपक्ष ने करार को ‘रणनीतिक चूक’ बताया

पवन खेड़ा ने दोहराया कि हालिया भारत–अमेरिका व्यापार गतिविधियां किसी कूटनीतिक सफलता की बजाय एक रणनीतिक गलत आकलन को दर्शाती हैं। उनके अनुसार, वैश्विक टैरिफ नियमों पर कानूनी चुनौती लंबित रहने के बावजूद जल्दबाज़ी में कदम उठाने से भारत की सौदेबाज़ी की स्थिति कमजोर हुई।

कांग्रेस लगातार इस अंतरिम व्यवस्था के तहत दी गई रियायतों पर सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि अमेरिकी नीतियों में हो रहे बदलावों ने उन आर्थिक मान्यताओं को ही बदल दिया है, जिनके आधार पर यह समझौता किया गया था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।