अनुराग ठाकुर ने ‘फर्जी वोटर सूची’ का आरोप साबित किया, कांग्रेस बोली; BJP ने किया पलटवार
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा विपक्षी नेताओं के कब्ज़े वाली कई लोकसभा सीटों पर मतदाता सूची में गड़बड़ियों और “वोट चोरी” के आरोप लगाने के एक दिन बाद, कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि इससे यह साबित होता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव..
नयी दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा विपक्षी नेताओं के कब्ज़े वाली कई लोकसभा सीटों पर मतदाता सूची में गड़बड़ियों और “वोट चोरी” के आरोप लगाने के एक दिन बाद, कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि इससे यह साबित होता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव “फर्जी वोटर लिस्ट” के आधार पर कराए गए थे।
कांग्रेस प्रवक्ता और एआईसीसी मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जैसे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नोटिस भेजा गया, वैसे ही ठाकुर को क्यों नहीं भेजा गया? उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि अनुराग ठाकुर द्वारा पेश किए गए सबूत हमें भी दिए जाएं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि BJP और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत है।”
बुधवार को अनुराग ठाकुर ने दावा किया था कि रायबरेली (जहाँ से राहुल गांधी सांसद हैं) में 2.69 लाख “संदिग्ध मतदाता” हैं। उन्होंने तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र डायमंड हार्बर और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की कन्नौज सीट को भी निशाने पर लिया।
खेड़ा ने कहा, “ठाकुर का विश्लेषण यह साबित करता है कि पिछला लोकसभा चुनाव (2024) फर्जी वोटर सूची के आधार पर हुआ था। तो क्या इसे धोखाधड़ी मानकर रद्द नहीं कर दिया जाना चाहिए?... हम अनुराग ठाकुर और BJP का आभार व्यक्त करते हैं कि उन्होंने राहुल गांधी जी की इस बात को सिद्ध कर दिया कि चुनाव फर्जी मतदाताओं के आधार पर लड़े जाते हैं।”
वहीं, पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास सत्ता की “लालच” में किए गए “धोखे, छल और फरेब” से भरा पड़ा है।
BJP के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय द्वारा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर लगाए गए आरोप को दोहराते हुए शेखावत ने कहा कि “उनका नाम पहली बार 1980 में वोटर लिस्ट में दर्ज हुआ था, जबकि वह तीन साल बाद भारतीय नागरिक बनीं।” उन्होंने गांधी परिवार पर आरोप लगाया कि “इस परिवार ने जनादेश चुराए, बूथ लूटे, नतीजे बदलने के लिए वोट अस्वीकृत कराए और मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया। अब यह परिवार खुद को लोकतंत्र का रक्षक बताने के लिए बेबुनियाद दावे कर रहा है।”
शेखावत ने कहा कि 1980 में सोनिया गांधी का मतदाता होना “भारत की संप्रभुता को चुनौती देने और संवैधानिक प्रक्रिया का अपमान करने” के बराबर था।
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