नयी दिल्ली बैठक में अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध पर बंटे दिखे ब्रिक्स देश
अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर मतभेदों के बीच भारत ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक के बाद चेयर स्टेटमेंट और आउटकम डॉक्यूमेंट जारी..
नयी दिल्ली। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर मतभेदों के बीच भारत ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक के बाद चेयर स्टेटमेंट और आउटकम डॉक्यूमेंट जारी किया। ब्रिक्स समूह में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रतिद्वंद्वी देश भी शामिल हैं।
भारत द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 11 देशों के इस समूह के सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में संप्रभुता, समुद्री सुरक्षा, नागरिक ढांचे और आम नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर “अपने-अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण और विभिन्न विचार” साझा किए।
पश्चिम एशिया संकट पर मतभेद
बयान के अनुसार चर्चा के दौरान कूटनीति, संप्रभुता के सम्मान, नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया गया।
बयान में कहा गया, “पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर कुछ सदस्य देशों के बीच अलग-अलग विचार थे। कई देशों ने मौजूदा संकट के जल्द समाधान, संवाद और कूटनीति के महत्व, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध समुद्री व्यापार और नागरिक ढांचे व आम लोगों की सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।”
साथ ही कई सदस्य देशों ने हालिया घटनाक्रमों के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को भी रेखांकित किया।
ब्रिक्स समूह में Brazil, Russia, India, China, South Africa, Ethiopia, Egypt, Iran, United Arab Emirates और Indonesia शामिल हैं।
अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद तेहरान ने इज़राइल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों, जिनमें ब्रिक्स सदस्य यूएई भी शामिल है, के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की।
अमेरिका पर ईरान का तीखा हमला
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने आज वाशिंगटन की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका ही है।
नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि 40 दिनों तक सैन्य उद्देश्यों में असफल रहने के बाद अमेरिका ने बातचीत का प्रस्ताव दिया, लेकिन तेहरान को उस पर कोई भरोसा नहीं है।
उन्होंने कहा, “40 दिनों के युद्ध के बाद जब अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने आक्रमण में कोई लक्ष्य हासिल करने में विफल रहा, तब उसने बातचीत की पेशकश की। हमें अमेरिकियों पर कोई भरोसा नहीं है। यही किसी भी कूटनीतिक प्रयास के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा है। हमारे पास अमेरिका पर भरोसा न करने के पर्याप्त कारण हैं, जबकि उनके पास हम पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है।”
गाजा और फिलिस्तीन पर ब्रिक्स का रुख
भारत द्वारा जारी चेयर स्टेटमेंट में कहा गया कि गाजा पट्टी, कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है और फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की पुष्टि की गई।
बयान में कहा गया, “मंत्रियों ने दोहराया कि गाजा पट्टी कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र का अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी को फिलिस्तीनी प्राधिकरण के अधीन एकीकृत करने के महत्व पर जोर दिया और फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार, जिसमें स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र का अधिकार भी शामिल है, की पुनः पुष्टि की।”
साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीनी प्राधिकरण को सुधार प्रक्रिया में सहयोग देने की अपील की गई, ताकि फिलिस्तीनियों की स्वतंत्र राष्ट्र की वैध आकांक्षाएं पूरी हो सकें।
हालांकि बयान में यह भी स्वीकार किया गया कि गाजा से जुड़े कुछ हिस्सों पर एक सदस्य देश ने आपत्ति जताई।
ब्रिक्स ढांचे को मजबूत करने पर जोर
14-15 मई को नई दिल्ली में हुई बैठक में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं जन-से-जन संपर्क जैसे तीन प्रमुख स्तंभों के तहत ब्रिक्स रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सदस्य देशों ने आपसी सम्मान, समानता, एकजुटता, खुलेपन, समावेशिता और सहमति की ब्रिक्स भावना को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।
बयान में कहा गया कि मंत्रियों ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए पूर्ण समर्थन व्यक्त किया और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान आयोजित होने वाली अगली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक का स्वागत किया, जिसकी मेजबानी 2027 के आगामी ब्रिक्स अध्यक्ष China द्वारा की जाएगी।
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