‘भारत खुद तय करे अपने रिश्ते’: ब्रिक्स बैठक में ईरान-यूएई तनाव के बीच बोले अब्बास अराघची
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने शुक्रवार को कहा कि भारत को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत किसी भी देश के साथ अपने संबंध तय करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान की प्राथमिकता भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखना..
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने शुक्रवार को कहा कि भारत को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत किसी भी देश के साथ अपने संबंध तय करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तेहरान की प्राथमिकता भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखना है।
नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान आयोजित प्रेस वार्ता में अराघची ने कहा कि भारत की विदेश नीति उसके अपने संप्रभु निर्णयों का विषय है।
उन्होंने कहा, “भारत के कई देशों के साथ संबंध हैं और यह भारत को तय करना है कि वह किन देशों के साथ कैसे रिश्ते रखे। हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण भारत और ईरान के संबंध हैं।”
भारत-ईरान संबंधों को बताया ऐतिहासिक
अराघची ने कहा कि ईरान भारत के साथ अपनी साझेदारी को बेहद महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने दोनों देशों को प्राचीन सभ्यताएं बताते हुए कहा कि दोनों के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।
उन्होंने कहा, “ईरान और भारत दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, जिनके बीच हमेशा बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। हमने सांस्कृतिक मूल्यों का आदान-प्रदान किया है। व्यापार और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ हमारे राजनीतिक संबंध और परामर्श भी बेहद मजबूत रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम निश्चित रूप से आपसी हित और पारस्परिक सम्मान के आधार पर भारत के साथ अपने मित्रतापूर्ण और मजबूत संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
जयशंकर के साथ लगातार संपर्क में रहने की बात
ईरानी विदेश मंत्री ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत सरकार द्वारा दिए गए आतिथ्य की सराहना की और हालिया संघर्ष के दौरान भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ करीबी संपर्क में रहने की बात कही।
उन्होंने कहा, “पिछले दो महीनों के दौरान, जब मेरे देश के खिलाफ युद्ध या कहें आक्रमण चल रहा था, तब हम लगातार संपर्क में रहे और एक-दूसरे से सलाह-मशविरा करते रहे।”
अराघची ने संकट के दौरान ईरानी जनता के प्रति भारत द्वारा दिखाई गई एकजुटता के लिए भी धन्यवाद दिया।
पश्चिम एशिया मुद्दे पर ब्रिक्स में मतभेद
नयी दिल्ली में हुई दो दिवसीय ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक संयुक्त बयान के बिना समाप्त हुई। भारत ने इसकी वजह पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के बीच “अलग-अलग विचार” बताए।
भारत ने कहा कि सदस्य देशों ने संप्रभुता, समुद्री सुरक्षा और नागरिक ढांचे तथा लोगों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपने-अपने राष्ट्रीय दृष्टिकोण रखे।
भारतीय बयान में फुटनोट के जरिए यह भी उल्लेख किया गया कि गाजा और लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा से जुड़े कुछ हिस्सों पर “एक सदस्य देश को आपत्ति” थी।
ब्रिक्स समूह में Brazil, Russia, India, China, South Africa, Ethiopia, Egypt, Iran, United Arab Emirates और Indonesia शामिल हैं।
ईरान संघर्ष के दौरान इस समूह के भीतर मतभेद अधिक स्पष्ट होकर सामने आए हैं, खासकर ईरान और यूएई के बीच।
अमेरिका और इज़राइल की आलोचना
गुरुवार को अराघची ने ब्रिक्स देशों से अमेरिका और इज़राइल की आलोचना करने की अपील की थी। उन्होंने ईरान पर हुए हमलों को “गैरकानूनी आक्रमण” बताया और सदस्य देशों से अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के “राजनीतिक इस्तेमाल” का विरोध करने का आग्रह किया।
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