CJI ने SC/ST में 'क्रीमी लेयर' लागू करने के फैसले को बताया मील का पत्थर, कहा – इससे सामाजिक न्याय को मिलेगी धार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण गवई ने कहा कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्गों के भीतर ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा लागू करने को अपने न्यायिक करियर का एक निर्णायक क्षण बताया..
नागपुर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण गवई ने कहा कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्गों के भीतर ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा लागू करने को अपने न्यायिक करियर का एक निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम सकारात्मक कार्रवाई (affirmative action) की भावना को मजबूत करता है और सामाजिक न्याय को परिष्कृत करता है।
गवई ने शनिवार को नागपुर में टाइम्स ऑफ इंडिया से विशेष बातचीत में कहा, “अगर हम ऊंचे पदों पर बैठे SC/ST अधिकारियों के बच्चों को उन्हीं सुविधाओं का लाभ दें, जो वास्तव में वंचित परिवारों के बच्चों को मिलना चाहिए, तो इससे आरक्षण की मूल भावना कमजोर होती है। क्रीमी लेयर की पहचान यह सुनिश्चित करती है कि लाभ सही लोगों तक पहुंचे।”
उनकी यह टिप्पणी SC/ST समूहों के भीतर आरक्षण लाभों के समान वितरण के लिए उप-वर्गीकरण (sub-categorisation) की अनुमति देने वाले एक जनहित याचिका (PIL) पर दिए गए हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में आई।
न्यायिक मर्यादा और संतुलन पर जोर
CJI गवई ने न्यायिक अतिक्रमण (judicial overreach) को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा:
“न्यायिक सक्रियता (judicial activism) जरूरी है, लेकिन वह न्यायिक दुस्साहस (judicial adventurism) या न्यायिक आतंकवाद (judicial terrorism) में नहीं बदलनी चाहिए। संसद कानून बनाती है, कार्यपालिका उसे लागू करती है और न्यायपालिका उसकी संवैधानिक समीक्षा करती है। अगर कोई भी अंग अपनी सीमाओं को लांघता है, तो **संवैधानिक संतुलन बिगड़ता है।” उन्होंने कहा, “संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, यह सामाजिक परिवर्तन का औजार है।”
सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद नहीं लेंगे
देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित CJI गवई ने स्पष्ट किया कि वह सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “यह मेरा व्यक्तिगत सिद्धांत है।”
उनका ध्यान सुप्रीम कोर्ट में लंबित 81,000 से अधिक मामलों को कम करने और ग्रामीण अदालतों की अवसंरचना सुधारने पर है।
उल्लेखनीय निर्णय:
CJI गवई ने अब तक करीब 300 फैसलों में योगदान दिया है। कुछ प्रमुख फैसले..
- अनुच्छेद 370 हटाने को पांच-न्यायाधीशों की पीठ के साथ बरकरार रखा। उन्होंने इसे “एक राष्ट्र, एक संविधान” की भावना के अनुरूप बताया।
- चुनावी बॉन्ड योजना को राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए रद्द किया।
- डिमोनेटाइजेशन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और विवाद समाधान (arbitration) जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय दिए।
- अलाहाबाद हाईकोर्ट के एक यौन उत्पीड़न मामले में अमानवीय टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक लगाई।
- न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रभीर पुरकायस्थ की गिरफ्तारी को दिल्ली पुलिस द्वारा प्रक्रियात्मक त्रुटियों के चलते अवैध करार दिया।
CJI गवई का यह बयान न केवल न्यायपालिका की संवैधानिक मर्यादाओं पर बल देता है, बल्कि आरक्षण व्यवस्था को और अधिक लक्षित और न्यायोचित बनाने की दिशा में एक बड़ा वैचारिक संकेत भी है। SC/ST वर्ग के भीतर ‘क्रीमी लेयर’ को लेकर सुप्रीम कोर्ट की स्वीकार्यता नवीन सामाजिक दृष्टिकोण को दर्शाती है और इससे आरक्षण का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचने की उम्मीद को बल मिलता है।
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