"मुख्यमंत्रियों को बदलना कांग्रेस की परंपरा है, भाजपा की नहीं": राजस्थान प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल
राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और विभिन्न बोर्डों व आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर उठ रहे कयासों के बीच भाजपा के राज्य प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने शनिवार को स्पष्ट किया कि ये सारे निर्णय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अधिकार क्षेत्र में आते..
जयपुर। राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और विभिन्न बोर्डों व आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर उठ रहे कयासों के बीच भाजपा के राज्य प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने शनिवार को स्पष्ट किया कि ये सारे निर्णय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा में मुख्यमंत्री को बीच कार्यकाल में बदलने की परंपरा नहीं है—यह कांग्रेस की संस्कृति है।
मुख्य बातें:
- अग्रवाल शनिवार को जयपुर में भाजपा की एक रणनीतिक बैठक को संबोधित कर रहे थे, जिसमें आगामी नगर निकाय और पंचायतीराज चुनावों, लंबित मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों पर चर्चा हुई।
- उनका यह बयान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के उस आरोप के बाद आया है जिसमें उन्होंने भाजपा में मुख्यमंत्री को हटाने की आंतरिक साज़िश की बात कही थी।
- अग्रवाल ने स्पष्ट किया..
“भजनलाल शर्मा को पार्टी नेतृत्व का पूरा विश्वास प्राप्त है। वे पार्टी के भीतर से आए हैं, पहले कार्यकर्ता हैं फिर मुख्यमंत्री। वे जमीनी कार्यकर्ताओं से गहराई से जुड़े हुए हैं और उनकी क्षमताओं से भली-भांति परिचित हैं। उन्हें सलाह देने की कोई ज़रूरत नहीं।”
क्या है पृष्ठभूमि?
राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लगातार अटकलें चल रही हैं। फिलहाल 200 सदस्यीय विधानसभा में सरकार अधिकतम 30 मंत्री नियुक्त कर सकती है, लेकिन अभी तक केवल 24 पद भरे गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और दोनों उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा शामिल हैं।
वहीं, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, और विपक्ष के नेता रहे राजेन्द्र राठौड़ जैसे वरिष्ठ नेता अपने-अपने समर्थकों के लिए राजनीतिक नियुक्तियों की मांग कर रहे हैं। इससे राजनीतिक खींचतान की अटकलें और तेज हो गई हैं।
कांग्रेस पर निशाना
गहलोत के आरोपों पर पलटवार करते हुए अग्रवाल ने कहा, “गहलोत अपने पूरे कार्यकाल में अपनी कुर्सी बचाने में लगे रहे, खासकर सचिन पायलट से। उनकी सरकार में कभी स्थिरता नहीं रही। आज भी वे हर जगह साज़िशें देखते हैं क्योंकि वे ऐसी ही राजनीतिक संस्कृति से आते हैं।”
उन्होंने दो टूक कहा, “राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन का कोई सवाल ही नहीं है। भजनलाल शर्मा को पूरे पाँच साल के लिए मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है। भाजपा में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि बीच में मुख्यमंत्री बदला जाए। यह कांग्रेस की आदत है।”
पार्टी अनुशासन की चेतावनी
उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “अगर कोई अंदरूनी रूप से आपत्ति उठाता है तो उस पर पार्टी अनुशासन के तहत कार्रवाई की जाएगी। भाजपा में असंतोष के लिए कोई स्थान नहीं है।”
विशेष टिप्पणीः
राधा मोहन दास अग्रवाल का यह बयान एक ओर भाजपा में चल रही अंदरूनी गुटबाज़ी की अटकलों को शांत करने का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पर तीखा हमला भी है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि भजनलाल शर्मा को पांच वर्ष के लिए मुख्यमंत्री बनाया गया है और उनकी नेतृत्व क्षमता पर कोई सवाल नहीं है। अब देखना होगा कि क्या जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा होती है या अंतर्कलह की चर्चाएं और तेज़ होती हैं।
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