केंद्र ने नये मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की, जस्टिस सूर्यकांत बन सकते हैं अगले CJI

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ के उत्तराधिकारी यानी वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के सेवानिवृत्त होने में अब लगभग एक महीना बचा है। इसी बीच केंद्र सरकार ने नये मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी..

केंद्र ने नये मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की, जस्टिस सूर्यकांत बन सकते हैं अगले CJI
25-10-2025 - 08:03 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ के उत्तराधिकारी यानी वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के सेवानिवृत्त होने में अब लगभग एक महीना बचा है। इसी बीच केंद्र सरकार ने नये मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है।

सरकार ने गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश गवई को पत्र लिखकर उनके उत्तराधिकारी का नाम सुझाने को कहा है। गौरतलब है कि CJI गवई 23 नवंबर 2025 को 65 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होंगे।

 वरिष्ठता के आधार पर सिफारिश की परंपरा

न्यायाधीशों की नियुक्ति और तबादले से संबंधित मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर’ के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश, जो इस पद के लिए उपयुक्त हों, उन्हें मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है।
परंपरा के मुताबिक, वर्तमान CJI अपने उत्तराधिकारी के रूप में वरिष्ठतम न्यायाधीश का नाम सुझाते हैं। निवर्तमान CJI गवई से उम्मीद है कि वे न्यायमूर्ति सूर्यकांत का नाम अपने उत्तराधिकारी के रूप में भेजेंगे।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत का परिचय

न्यायमूर्ति सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था।
उन्होंने 1984 में महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
वह 7 जुलाई 2000 को हरियाणा के सबसे कम उम्र के एडवोकेट जनरल (38 वर्ष की आयु में) बने।

उन्हें 9 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में वे 5 अक्टूबर 2018 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया।

अगर उनकी नियुक्ति होती है, तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश बनेंगे और 9 फरवरी 2027 तक (करीब 15 माह) इस पद पर रहेंगे।

 परंपरा से अपवाद केवल दो बार

भारत के न्यायिक इतिहास में केवल दो बार यह परंपरा तोड़ी गई थी..

  • 1973 में न्यायमूर्ति ए.एन. रे को तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को दरकिनार कर CJI बनाया गया था।
  • 1977 में न्यायमूर्ति एम.एच. बेग को न्यायमूर्ति एच.आर. खन्ना से वरिष्ठता में नीचे होने के बावजूद नियुक्त किया गया था।

 उल्लेखनीय फैसलों में रहा योगदान

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने दो दशक लंबे न्यायिक करियर में कई ऐतिहासिक और संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण फैसलों में भूमिका निभाई है, जिनमें प्रमुख हैं..

विषय

भूमिका / फैसला

अनुच्छेद 370 हटाने का मामला

संविधान पीठ का हिस्सा रहे

राजद्रोह कानून (सेडिशन लॉ)

कानून को सरकार द्वारा पुनर्विचार तक स्थगित करने का आदेश देने वाली बेंच में शामिल

इलेक्शन कमीशन और बिहार मतदाता सूची मामला

65 लाख अपवर्जित मतदाताओं का विवरण सार्वजनिक करने का आदेश

महिला आरक्षण (बार एसोसिएशन)

बार एसोसिएशनों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्देश

किसान आंदोलन, शंभू बॉर्डर मामला

सुनवाई करने वाली पीठ का नेतृत्व किया

पीएम मोदी की सुरक्षा चूक (2022)

जांच के लिए न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति गठित करने का आदेश

वन रैंक, वन पेंशन (OROP)

योजना को संविधानसम्मत ठहराया

पेगासस जासूसी मामला

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।

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