भारत से रिश्ते सुधारने के लिए तैयार: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने BJP से सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई
एक दुर्लभ पहल के तहत चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) ने भारत की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है, ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया जा सके..
नयी दिल्ली। एक दुर्लभ पहल के तहत चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) ने भारत की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है, ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया जा सके। यह बयान उस समय आया जब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री लियू जियानचाओ ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की।
लियू जियानचाओ ने कहा, "चीन की कम्युनिस्ट पार्टी BJP के साथ संवाद को मजबूत करने के लिए तैयार है, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की जा सकें... भारत और चीन जैसे दो पड़ोसी, बड़े विकासशील देश और प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच स्वस्थ और स्थिर संबंध न केवल दोनों देशों के लोगों के मूल हित में हैं, बल्कि ग्लोबल साउथ की साझा आकांक्षाओं के अनुरूप भी हैं।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही घंटे पहले डॉ. जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में आतंकवाद और उग्रवाद जैसे मुद्दों को गंभीरता से उठाया।
SCO बैठक में आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख
SCO बैठक के दौरान जयशंकर ने विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने SCO के मूल उद्देश्यों की याद दिलाई।
जयशंकर ने कहा, "SCO की स्थापना तीन बुराइयों — आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद — से लड़ने के लिए की गई थी। अक्सर ये तीनों साथ-साथ दिखाई देते हैं। हाल ही में पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ, वह जम्मू-कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और धार्मिक फूट फैलाने के इरादे से किया गया।"
उन्होंने आगे बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस हमले की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने की जरूरत पर बल दिया है और भारत सरकार ने इस दिशा में जरूरी कदम उठाए हैं।
जयशंकर ने कहा, "SCO को अपने मूल उद्देश्यों पर खरा उतरने के लिए आतंकवाद के खिलाफ कठोर और समझौताविहीन रुख अपनाना होगा।"
बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ती दुनिया में समावेशी दृष्टिकोण की मांग
विदेश मंत्री ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि इस बदलती वैश्विक संरचना में सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "आज की दुनिया बहुध्रुवीयता की ओर अग्रसर है — न केवल राष्ट्रीय क्षमताओं के पुनर्वितरण के संदर्भ में, बल्कि SCO जैसी प्रभावशाली समूहों के उभार के रूप में भी। वैश्विक मामलों में हमारे योगदान की क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम साझा एजेंडे पर कितनी एकजुटता से आगे बढ़ते हैं।"
पृष्ठभूमि में गलवान संघर्ष और विचारधारात्मक मतभेद
गौरतलब है कि BJP और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच संबंध पहले से सौहार्दपूर्ण नहीं रहे हैं — खासकर गलवान घाटी संघर्ष और सीमा विवाद के बाद। इसलिए CPC द्वारा BJP से संवाद बढ़ाने की पेशकश को कूटनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन की यह पहल केवल औपचारिक संवाद तक सीमित रहती है या भविष्य में भारत-चीन संबंधों में कोई ठोस सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक बनती है।
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