चीन के सिस्टम फेल, भारत का ‘सुदर्शन’ सफल; वायुसेना खरीदेगी S-400 की 5 नयी स्क्वाड्रन
दुनिया के कई संघर्षों में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम के कमजोर प्रदर्शन की खबरों के बीच भारत अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। भारतीय वायुसेना जल्द ही रूस से S-400 ‘सुदर्शन’ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की पाँच और स्क्वाड्रन खरीदने की तैयारी ..
नयी दिल्ली। दुनिया के कई संघर्षों में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम के कमजोर प्रदर्शन की खबरों के बीच भारत अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। भारतीय वायुसेना जल्द ही रूस से S-400 ‘सुदर्शन’ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की पाँच और स्क्वाड्रन खरीदने की तैयारी कर रही है।
यह रणनीतिक फैसला पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ हुए सैन्य अभियान में मिली सफलता के बाद लिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि भारत पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर अपनी हवाई सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना चाहता है।
भारत रूस से 5 और S-400 क्यों खरीद रहा है
रिपोर्टों के अनुसार यह निर्णय पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 की प्रभावी भूमिका के बाद लिया गया।
बताया गया कि इस ऑपरेशन के दौरान S-400 प्रणाली ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और एक उच्च-मूल्य वाले जासूसी विमान को मार गिराया। यह भारतीय वायुसेना के इतिहास में सबसे लंबी दूरी पर किया गया ऑपरेशनल इंटरसेप्ट माना जा रहा है।
इस प्रणाली ने पाकिस्तान की ओर से दागी गई क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों को भी निष्क्रिय कर दिया, जिससे युद्ध जैसी परिस्थितियों में इसकी सटीकता और विश्वसनीयता साबित हुई।
हालिया संघर्षों में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम की कमजोरी
रिपोर्टों में कहा गया है कि कई सैन्य परिस्थितियों में चीनी मूल के एयर डिफेंस सिस्टम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन का HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया था, लेकिन वह भारतीय विमानों और मिसाइलों को उनके लक्ष्यों पर हमला करने से नहीं रोक सका।
इसी तरह अन्य अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों में भी HQ-9 प्रणाली incoming खतरों के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा देने में असफल बताई गई।
भारत-रूस S-400 समझौते की स्थिति
भारत और रूस के बीच 2018 में S-400 प्रणाली की पाँच स्क्वाड्रन खरीदने का समझौता हुआ था।
अब तक इनमें से तीन स्क्वाड्रन भारतीय वायुसेना में शामिल होकर सक्रिय हो चुकी हैं, जबकि बाकी दो की आपूर्ति का इंतजार है। भारत ने रूस से इनकी डिलीवरी तेज करने का अनुरोध भी किया है।
इसके साथ ही वायुसेना अतिरिक्त मिसाइलों की खरीद पर भी विचार कर रही है ताकि देश की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत किया जा सके।
नई स्क्वाड्रन कहाँ तैनात होंगी
रक्षा मंत्रालय जल्द ही इन पाँच अतिरिक्त स्क्वाड्रनों की खरीद को मंजूरी दे सकता है। सुरक्षा रणनीति के अनुसार इन अत्याधुनिक प्रणालियों को भारत की पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। इससे संभावित हवाई खतरों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा कवच तैयार किया जा सकेगा।
स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम भी बना रहा भारत
भारत विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने के लिए अपना लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम भी विकसित कर रहा है।
यह परियोजना प्रोजेक्ट कुशा के तहत चल रही है, जिसका नेतृत्व Defence Research and Development Organisation (DRDO) कर रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में पूरी तरह स्वदेशी लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता तैयार करना है।
निष्कर्ष:
अतिरिक्त S-400 की खरीद और स्वदेशी प्रणालियों के विकास के साथ भारत बहु-स्तरीय हवाई सुरक्षा ढांचा तैयार कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा और वैश्विक सामरिक स्थिति दोनों को मजबूत करेगी।
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