DGMO ने समझाया ऑपरेशन सिंदूर का संदेश, भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'याचना नहीं, अब रण होगा' की गर्जना
"याचना नहीं, अब रण होगा।" यह पंक्ति भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दुर्योधन से कही गई थी, जब दुर्योधन ने पांडवों की शांतिपूर्ण मांगों को ठुकरा दिया था। तब श्रीकृष्ण ने क्रोधित होकर यह ऐलान किया था कि अब वार्ता का समय समाप्त हो चुका है, और युद्ध अपरिहार्य है..
नयी दिल्ली। सोमवार, 12 मई को भारतीय सेना के महानिदेशक सैन्य अभियान (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'ऑपरेशन सिंदूर' की विस्तृत जानकारी दी। यह ऑपरेशन पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सीधी जवाबी कार्रवाई थी।
इस दौरान जनरल घई ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रसिद्ध कविता ‘रश्मिरथी’ से एक प्रखर पंक्ति उद्धृत की:
"याचना नहीं, अब रण होगा।"
इस पंक्ति का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व:
यह पंक्ति भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दुर्योधन से कही गई थी, जब दुर्योधन ने पांडवों की शांतिपूर्ण मांगों को ठुकरा दिया था। तब श्रीकृष्ण ने क्रोधित होकर यह ऐलान किया था कि अब वार्ता का समय समाप्त हो चुका है, और युद्ध अपरिहार्य है।
दिनकर की कलम ने इस क्षण को कुछ इस प्रकार अमर किया:
"समझौता सीता की तरह, वंदना नहीं अब रण होगा,
जीवन जय के लिए, मृत्यु से भी टकराना होगा!"
DGMO का संदेश
DGMO ने इस पंक्ति का उपयोग कर यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब शांतिपूर्ण निवेदन नहीं, बल्कि दृढ़ और निर्णायक सैन्य कार्रवाई की नीति पर है। उन्होंने कहा कि “हमने आतंकी ठिकानों पर निशाना साधा, लेकिन दुर्भाग्यवश पाकिस्तान की सेना ने आतंकियों का पक्ष लिया। हमें मजबूरन जवाब देना पड़ा। हमारी कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ है, किसी देश की जनता के खिलाफ नहीं।”
ऑपरेशन सिंदूर का सार
- आरंभ: 7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में
- लक्ष्य: पाकिस्तान और PoK में मौजूद 9+ आतंकी शिविर
- परिणाम: रणनीतिक रूप से कई आतंकवादी ठिकानों का विनाश, पाकिस्तान की सैन्य संरचना को भी क्षति
- संदेश: भारत अब हर आतंकी हमले का जवाब “घर में घुसकर” देगा
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने केवल एक सैन्य कार्रवाई की जानकारी नहीं दी, बल्कि एक राजनीतिक और सांस्कृतिक सन्देश भी दिया — भारत अब संयम नहीं, सुरक्षा की आक्रामक नीति अपनाएगा।
भारतीय सेना के सैन्य अभियानों के महानिदेशक (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने सोमवार शाम करीब 5 बजे अपने पाकिस्तानी समकक्ष मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला से हॉटलाइन पर बातचीत की। बातचीत लगभग 30 मिनट चली, जिसमें दो दिन पहले हुए संघर्षविराम समझौते को पूरी तरह लागू करने पर जोर दिया गया।
सेना ने बताया कि इस चर्चा में यह स्पष्ट रूप से तय किया गया कि दोनों पक्ष "एक भी गोली नहीं चलाएंगे" और न ही कोई आक्रामक या शत्रुतापूर्ण कार्रवाई करेंगे।
पृष्ठभूमि: ऑपरेशन सिंदूर और युद्ध की आशंका
- भारत ने 7 मई को "ऑपरेशन सिंदूर" शुरू किया था, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का प्रत्यक्ष सैन्य उत्तर था। इस हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे।
- ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ से अधिक आतंकी ठिकानों पर हमला किया।
- इन कार्रवाईयों के बाद दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों की सबसे गंभीर सैन्य तनातनी पैदा हो गई, जिसे युद्ध का रूप लेने की आशंका थी।
संघर्षविराम की घोषणा और उल्लंघन
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को भारत-पाक समझौते की घोषणा की थी।
- इसके तुरंत बाद ही पाकिस्तानी सेना ने सीमा और एलओसी पर गोलीबारी कर दी और ड्रोन की घुसपैठ भी हुई।
इस पर घई ने सख्त चेतावनी दी कि यदि उल्लंघन दोहराया गया, तो भारत "भयानक और दंडात्मक प्रतिक्रिया" देगा। - रविवार को कोई उल्लंघन नहीं हुआ, लेकिन सोमवार शाम को फिर से ड्रोन देखे गए, जिस पर भारत की एयर डिफेंस यूनिट ने कार्रवाई की।
भारत का रुख: "ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पहली बार सार्वजनिक टिप्पणी करते हुए कहा, "पाकिस्तान सैन्य रूप से पराजित होने के बाद ही संघर्षविराम की भीख मांगने पर मजबूर हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरा नहीं हुआ है। पाकिस्तान से कोई भी बात सिर्फ आतंकवाद और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) पर होगी।"
उन्होंने यह भी दोहराया, "आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते, और खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।"
वायुसेना का बयान
वायुसेना के एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा, "हमारा निशाना आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाला ढांचा था। लेकिन, दुर्भाग्यवश पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों का साथ देने का विकल्प चुना, जिससे हमें जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।"
DGMO का स्पष्ट संदेश
जनरल घई से जब पूछा गया कि क्या पाकिस्तान इस संघर्षविराम का उपयोग युद्ध तैयारी के लिए कर सकता है, तो उन्होंने कहा, "मैं इस बात से चिंतित नहीं हूं कि पाकिस्तान क्या करेगा। मुझे इस बात की चिंता है कि हम क्या करेंगे। हमारे पास एक रोडमैप है और हम उसे पूरी प्रतिबद्धता से लागू करेंगे।"
यह स्पष्ट है कि भारत संघर्षविराम को कमजोरी नहीं, बल्कि रणनीतिक बढ़त मानकर चल रहा है। भारतीय सेना ने साफ कर दिया है कि अगर शर्तों का उल्लंघन हुआ, तो जवाब बहुत कड़ा होगा।
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