दाऊदी बोहरा नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को बताया लंबे समय से प्रतीक्षित कानून
दाऊदी बोहरा समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और हाल ही में पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के लिए उनका आभार प्रकट किया...
नयी दिल्ली। दाऊदी बोहरा समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और हाल ही में पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के लिए उनका आभार प्रकट किया। प्रतिनिधिमंडल ने इस अधिनियम को समुदाय की "लंबे समय से प्रतीक्षित आवश्यकता" बताया।
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, प्रतिनिधियों ने कहा कि यह उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग थी। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सिद्धांत "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" में पूरी आस्था जताई।
दाऊदी बोहरा समुदाय की उत्पत्ति पश्चिमी भारत से हुई है, लेकिन इनका वैश्विक फैलाव 40 से अधिक देशों में है। इनकी पैतृक वंशावली मिस्र के फातिमी इमामों से जुड़ी है, जो पैगंबर हजरत मोहम्मद के प्रत्यक्ष वंशज माने जाते हैं। समुदाय का नेतृत्व "अल-दा’ई अल-मुतलक़" (पूर्णाधिकारी धार्मिक प्रतिनिधि) के हाथों में होता है, जिनका प्रारंभिक ठिकाना यमन था, लेकिन करीब 450 साल पहले उन्होंने भारत को अपनी स्थायी आधारभूमि बनाया।
इसी दिन पहले, सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम 2025 की कुछ धाराओं पर सात दिन की अस्थायी रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।
मुख्य न्यायाधीश संजय खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के उस बयान को संज्ञान में लिया जिसमें उन्होंने कहा कि 2025 के अधिनियम के तहत केंद्रीय वक्फ परिषद और औक़ाफ बोर्डों में कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी, और 1995 अधिनियम के तहत पंजीकृत मौजूदा वक्फ संपत्तियां अप्रभावित रहेंगी।
अगली सुनवाई 5 मई को निर्धारित की गई है।
यह अधिनियम 5 अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ, जो इससे पहले संसद के दोनों सदनों से पास हुआ था। राज्यसभा में यह विधेयक 128 के पक्ष और 95 के विपक्ष में पारित हुआ, जबकि लोकसभा में इसे 288 समर्थन और 232 विरोध मत मिले।
इस अधिनियम के खिलाफ अब तक 72 याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं, जिनमें AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), जमीयत उलेमा-ए-हिंद, DMK, और कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी व मोहम्मद जावेद शामिल हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर यह आग्रह किया है कि कोई भी अंतरिम आदेश पारित करने से पहले सरकार को सुना जाए।
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