दिल्ली ब्लास्ट केस: अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद के पुश्तैनी मकान पर तोड़फोड़ का नोटिस, जांच का दायरा और बढ़ा
अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जिसमें मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी शामिल हैं, इन दिनों गंभीर जांच के घेरे में है। इसके संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी पर फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। इससे पहले, अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों का नाम भी कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़ा पाया..
नयी दिल्ली। अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जिसमें मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी शामिल हैं, इन दिनों गंभीर जांच के घेरे में है। इसके संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी पर फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। इससे पहले, अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों का नाम भी कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़ा पाया गया था।
इसी बीच यूनिवर्सिटी पर बढ़ते दबाव के बीच इंदौर के मिलिट्री हेडक्वार्टर ऑफ वॉर (MHOW) कैंटोनमेंट बोर्ड ने गुरुवार को सिद्दीकी के परिवार को उनके पुश्तैनी घर खाली करने का नोटिस जारी किया है। MHOW ने परिवार से तीन दिनों के अंदर घर खाली करने को कहा है, जिसके बाद मकान तोड़ने की कार्रवाई शुरू होगी।
30 साल पहले घोषित हो चुकी है अवैध संपत्ति
अधिकारियों के अनुसार, यह मकान करीब 30 वर्ष पहले अवैध घोषित किया गया था। यह संपत्ति जवाद सिद्दीकी के पिता के नाम पर है, जो लगभग 20 वर्षों तक शहर के शहर काज़ी रहे थे।
कैंटोनमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विकास कुमार विश्नोई के मुताबिक, यह संपत्ति ब्रिटिश काल के एक अनुदान के तहत है, जिसमें केवल आवासीय उपयोग की अनुमति थी। वर्ष 1995-96 में मकान का पुनर्निर्माण किया गया था और इसके बाद जवाद सिद्दीकी ने रजिस्ट्रेशन और स्वामित्व हस्तांतरण के लिए आवेदन किया था। लेकिन प्राधिकरणों ने पाया कि यह चार मंज़िला निर्माण कैंटोनमेंट अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
विश्नोई के अनुसार, हालिया समीक्षा में भी यह ढांचा अवैध पाया गया, जिसके बाद कार्रवाई तेज की गई। उन्होंने बताया कि 1996 से 1997 के बीच इस संबंध में तीन नोटिस जारी किए गए थे।
दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की जांच तब और गहरी हो गई जब यह सामने आया कि दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट केस में शामिल कथित दिल्ली बम हमलावर — आरोपित सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर-उन-नबी, और उसके सहयोगी डॉ. मज़म्मिल शकील गनई तथा डॉ. शाहीन शाहिद सभी ने किसी न किसी रूप में अल-फलाह संगठन में सेवाएं दी थीं।
दूसरी ओर, संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी पर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप गहराते जा रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को दिल्ली और फरीदाबाद में 25 स्थानों पर छापेमारी के बाद उन्हें गिरफ्तार किया। बुधवार को अदालत ने उन्हें 13 दिन की ED कस्टडी में भेज दिया।
ED का आरोप है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने छात्रों के विश्वास, भविष्य और वैध अपेक्षाओं को नुकसान पहुंचाते हुए खुद को अनुचित लाभ पहुंचाया। एजेंसी का दावा है कि यूनिवर्सिटी ने 415.1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम डोनेशन इनकम हासिल की, जिसे वे "अपराध की आय" (proceeds of crime) बताते हैं।
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