आबकारी केस: केजरीवाल समेत 22 अन्य को ED की याचिका पर जवाब देने के लिए 2 अप्रैल तक का समय
Delhi High Court ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और 22 अन्य आरोपियों को Enforcement Directorate (ED) की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 2 अप्रैल तक का समय दिया। ED ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट द्वारा केस से बरी करते समय एजेंसी के खिलाफ की गई “प्रतिकूल टिप्पणियों” को हटाने (expunge) की मांग..
नयी दिल्ली। Delhi High Court ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और 22 अन्य आरोपियों को Enforcement Directorate (ED) की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 2 अप्रैल तक का समय दिया। ED ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट द्वारा केस से बरी करते समय एजेंसी के खिलाफ की गई “प्रतिकूल टिप्पणियों” को हटाने (expunge) की मांग की है।
अदालत ने यह भी नाराज़गी जताई कि केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने पहले तय समय सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल नहीं किया।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
Justice Swarana Kanta Sharma की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 10 मार्च की पिछली सुनवाई में शुरुआत में अदालत ने केजरीवाल और अन्य से जवाब लेने की जरूरत नहीं समझी थी, लेकिन उनके वकीलों के आग्रह पर जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई थी। इसके लिए 19 मार्च तक का समय दिया गया था।
सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने अतिरिक्त समय मांगा। उन्होंने तर्क दिया कि Central Bureau of Investigation (CBI) द्वारा दिए गए 600 पन्नों के आदेश का सावधानीपूर्वक अध्ययन जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि अदालत की टिप्पणियां सामान्य (general) हैं या किसी विशेष व्यक्ति/एजेंसी के खिलाफ।
इस पर जज ने सवाल उठाया कि जवाब दाखिल करने के लिए पूरा आदेश पढ़ने की क्या जरूरत है। अदालत ने कहा..
- “एक जांच एजेंसी (ED) कह रही है कि ट्रायल कोर्ट के जज ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर टिप्पणी की है।”
- “मैंने पिछली तारीख पर भी कहा था कि मैं भी ऐसी टिप्पणियां करती हूं, इससे आपको क्या नुकसान है?”
- “आपने खुद कहा था कि जवाब दाखिल करना है, अब कह रहे हैं कि 600 पन्ने पढ़ने पड़ेंगे—इसकी कोई जरूरत नहीं है।”
ED और CBI का पक्ष
ED के वकील, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल SV Raju और विशेष वकील Zoheb Hossain ने कहा कि जवाब दाखिल करने की जरूरत नहीं है और यह सिर्फ सुनवाई को टालने की कोशिश है।
वहीं CBI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल DP Singh ने भी कहा कि जवाब दाखिल करना आवश्यक नहीं है।
ट्रायल कोर्ट का फैसला क्या था?
27 फरवरी को Rouse Avenue Court ने केजरीवाल और 22 अन्य को इस मामले में बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि CBI के पास ऐसा कोई प्राथमिक (prima facie) सबूत नहीं है जिससे आरोप साबित हो सकें।
ट्रायल कोर्ट की अहम टिप्पणियां
ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि:
- सिर्फ चुनावी फंडिंग में गड़बड़ी या अधिक खर्च के आरोपों के आधार पर राज्य पुलिस, CBI या ED की जांच शुरू या जारी नहीं रखी जा सकती।
- Prevention of Corruption Act और Prevention of Money Laundering Act जैसे कड़े कानूनों का इस्तेमाल चुनावी कानूनों के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता।
- राजनीतिक आरोपों को आपराधिक मामलों में बदलने के लिए इन कानूनों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
ED की याचिका में क्या कहा गया?
ED ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा कि..
- ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश के 18 पैराग्राफ में जो टिप्पणियां की हैं, वे भले ही सामान्य हों, लेकिन एजेंसी को बिना सुने ही “दोषी” ठहराया गया।
- आदेश में एजेंसी के खिलाफ आरोप लगाए गए, जबकि वह उस कार्यवाही में पक्षकार (party) भी नहीं थी।
- मामला सिर्फ CBI की जांच तक सीमित था, ऐसे में ट्रायल कोर्ट को इस तरह की टिप्पणियां करने का अधिकार नहीं था।
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