काबुल हमले के विवाद पर पाकिस्तान का भारत को जवाब, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा
Pakistan ने बुधवार को India की उन टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की, जिन्हें उसने “अनुचित” बताया। ये टिप्पणियां अफगानिस्तान में कथित आतंकी ढांचे के खिलाफ पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को लेकर की गई..
इस्लामाबाद। Pakistan ने बुधवार को India की उन टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की, जिन्हें उसने “अनुचित” बताया। ये टिप्पणियां अफगानिस्तान में कथित आतंकी ढांचे के खिलाफ पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को लेकर की गई थीं।
भारत ने मंगलवार को काबुल में ड्रग ट्रीटमेंट सेंटर पर पाकिस्तान के “बर्बर” हवाई हमले की कड़ी निंदा की थी और इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता पर “सीधा हमला” तथा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा बताया था।
सोमवार को हुए इस हमले में 400 से अधिक लोगों की मौत पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह “नरसंहार को सैन्य कार्रवाई के रूप में पेश करने की कोशिश” कर रहा है।
इसके जवाब में पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता Tahir Andrabi ने कहा, “पाकिस्तान अफगानिस्तान में आतंकी ढांचे के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर भारत के विदेश मंत्रालय के इस आधारहीन, भ्रामक और अनुचित बयान को खारिज करता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह बयान “भारत की खुली पाखंड और दोहरे मापदंड” को दर्शाता है।
अंद्राबी ने भारत से अपील की कि वह “अफगान जमीन से संचालित आतंकी समूहों को समर्थन और संरक्षण देना बंद करे।”
चीन अब इस संघर्ष में क्यों हस्तक्षेप कर रहा है?
Pakistan और Afghanistan के बीच काबुल में हालिया हवाई हमलों के बाद तनाव तेजी से बढ़ गया है, जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। इस स्थिति को देखते हुए China ने कूटनीतिक हस्तक्षेप तेज कर दिया है।
पाकिस्तान का कहना है कि उसने “ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक” के तहत आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि Taliban ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि हमले में एक नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हुई। पाकिस्तान ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि किसी नागरिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया।
तनाव की जड़ क्या है?
इस विवाद की जड़ लंबे समय से चली आ रही है..
- पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल में तालिबान सरकार Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) को पनाह और समर्थन दे रही है
- तालिबान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है
- Durand Line को लेकर दशकों पुराना सीमा विवाद
हाल के महीनों में सीमा पार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
चीन की दिलचस्पी क्यों बढ़ी?
Wang Yi ने इस मुद्दे पर इस्लामाबाद और काबुल दोनों के अधिकारियों से बातचीत की है और संयम बरतने, तुरंत युद्धविराम और सीधे संवाद की अपील की है।
साथ ही, Xi Jinping ने भी तनाव कम करने पर जोर दिया है।
चीन के हस्तक्षेप के पीछे कई बड़े कारण हैं..
- चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) में 65 अरब डॉलर से अधिक का निवेश
- यह परियोजना Belt and Road Initiative का प्रमुख हिस्सा है
- अफगान-पाक सीमा पर अस्थिरता से इन परियोजनाओं को खतरा
सुरक्षा और आर्थिक चिंताएं
चीन को डर है कि लंबा संघर्ष..
- चरमपंथी संगठनों को बढ़ावा दे सकता है
- उसके पश्चिमी क्षेत्रों की सुरक्षा को खतरा पहुंचा सकता है
साथ ही, अफगानिस्तान की खनिज संपदा (करीब 1 ट्रिलियन डॉलर) चीन के लिए बड़ा आर्थिक अवसर है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और भी जरूरी हो जाती है।
आगे क्या?
हालांकि चीन की मध्यस्थता जारी है, लेकिन हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। हालिया हमले ऐसे समय हुए हैं जब कूटनीतिक प्रयास जारी थे, जिससे साफ है कि दोनों पक्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक दबाव कूटनीति पर भारी पड़ रहे हैं।
निष्कर्ष:
भारत-पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप, अफगानिस्तान में बढ़ता तनाव और चीन की सक्रियता—ये सभी मिलकर क्षेत्र को एक बड़े भू-राजनीतिक संकट की ओर ले जा सकते हैं। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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