एनईपी को लेकर फडणवीस और स्टालिन में जुबानी जंग
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच तीखी बयानबाज़ी छिड़ गई है। फडणवीस ने स्टालिन को नसीहत दी है..
नयी दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच तीखी बयानबाज़ी छिड़ गई है। फडणवीस ने स्टालिन को नसीहत दी है कि वे प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांगने से पहले खुद NEP को ठीक से समझें।
फडणवीस ने सोशल मीडिया पर स्टालिन की आलोचना का जवाब देते हुए लिखा, “श्री स्टालिन, आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से स्पष्टीकरण मांगने से पहले आपको राष्ट्रीय शिक्षा नीति को गहराई से समझने की ज़रूरत है। पहले आप यह तो पढ़िए कि NEP असल में है क्या!”
उन्होंने नीति की पूरी जानकारी के लिए सरकार की आधिकारिक वेबसाइट का लिंक भी साझा किया:
https://education.gov.in/national-education-policy
फडणवीस का ज़ोर — बहुभाषिकता की स्वतंत्रता
फडणवीस ने कहा कि NEP किसी भी विशेष भाषा को अनिवार्य नहीं बनाता बल्कि अंग्रेज़ी के अलावा दो भारतीय भाषाओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा, “जहाँ तक महाराष्ट्र की बात है, हम हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, संस्कृत या छात्र की पसंद की किसी भी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ने की छूट देते हैं। असली सवाल यह है, अगर कोई हिंदी पढ़ना चाहता है तो आपको बहुभाषिकता से दिक्कत क्यों है?”
स्टालिन की टिप्पणी:
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब एमके स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर फडणवीस की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि फडणवीस ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर जनता के विरोध के चलते अपने पुराने बयान से पलटी मार ली है।
स्टालिन ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को ₹2,152 करोड़ की राशि यह कहकर रोक दी कि राज्य NEP के तहत तीसरी अनिवार्य भाषा पढ़ाने को तैयार नहीं है।
उन्होंने केंद्र सरकार से दो स्पष्ट सवाल पूछे:
- क्या केंद्र स्पष्ट रूप से यह घोषणा करेगा कि NEP के तहत तीसरी भाषा पढ़ाना अनिवार्य नहीं है?
- क्या केंद्र सरकार तमिलनाडु के लिए रोक कर रखी गई ₹2,152 करोड़ की राशि को तुरंत जारी करेगी?
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