हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट: अमेरिकी नाकेबंदी से पहले तेल टैंकरों में मची भगदड़
मध्य पूर्व के सबसे अहम समुद्री मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा संभावित नाकेबंदी की घोषणा के बाद तेल और गैस टैंकर तेजी से इस मार्ग को पार करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि समय रहते सुरक्षित निकल..
नयी दिल्ली/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व के सबसे अहम समुद्री मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा संभावित नाकेबंदी की घोषणा के बाद तेल और गैस टैंकर तेजी से इस मार्ग को पार करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि समय रहते सुरक्षित निकल सकें।
अमेरिका की नाकेबंदी की तैयारी
डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी नौसेना सोमवार से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास नाकेबंदी शुरू करेगी। यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद उठाया जा रहा है, जिससे दो सप्ताह से जारी नाजुक युद्धविराम भी खतरे में पड़ गया है।
यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे (10 a.m. ET) से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाजों पर नाकेबंदी लागू की जाएगी।
हालांकि, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य देशों के बंदरगाहों के लिए जाने वाले जहाजों की आवाजाही को नहीं रोका जाएगा।
ईरान की सख्त चेतावनी
इस बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर कोई सैन्य जहाज इस क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो उसे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
टैंकरों की तेज आवाजाही
शिपिंग डेटा के अनुसार..
- पाकिस्तान के झंडे वाले टैंकर “शलामार” और “खैरपुर” रविवार को खाड़ी क्षेत्र में दाखिल हुए
- “शलामार” यूएई जाकर कच्चा तेल लोड करेगा
- “खैरपुर” कुवैत से रिफाइंड प्रोडक्ट लेने जा रहा है
- लाइबेरिया का VLCC “मोम्बासा B” भी इस क्षेत्र में मौजूद है
- माल्टा का टैंकर “एगियोस फनूरियोस I” रास्ता बदलकर ओमान की खाड़ी में रुक गया
इसके अलावा, शनिवार को तीन बड़े सुपरटैंकर पूरी तरह तेल से लदे हुए इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने में सफल रहे। ये युद्धविराम के बाद खाड़ी से बाहर जाने वाले पहले जहाज माने जा रहे हैं।
वैश्विक असर की आशंका
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है।
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