राहुल गांधी ने कांग्रेस को दिया नया मंत्र: भाजपा की ‘कठोर ध्रुवीकरण’ नीति से निपटने की रणनीति स्पष्ट
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि भाजपा की 'हार्ड पोलराइजेशन' यानी कठोर ध्रुवीकरण की राजनीति का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को किसी समुदाय का नाम लेने से नहीं कतराना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह बात कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की हालिया बैठक में कही..
अहमदाबाद। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि भाजपा की 'हार्ड पोलराइजेशन' यानी कठोर ध्रुवीकरण की राजनीति का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को किसी समुदाय का नाम लेने से नहीं कतराना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह बात कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की हालिया बैठक में कही, जहां पार्टी नेताओं ने भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर स्पष्टता मांगी थी।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने ज़ोर देकर कहा कि चाहे ईसाई हों, मुसलमान, सिख, ओबीसी या अन्य वंचित वर्ग – कांग्रेस को सभी समुदायों का नाम लेकर अपने समावेशी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी एक वर्ग विशेष की पार्टी नहीं है, बल्कि सभी के लिए समान अधिकार और प्रतिनिधित्व की बात करती है।
यह बैठक पटेल मेमोरियल, अहमदाबाद में हुई, जिसमें सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसे आगामी AICC सत्र में पेश किया जाना है।
राहुल गांधी ने इस बैठक में यह भी कहा कि उन्हें कांग्रेस की आगे की रणनीति को लेकर कोई भ्रम नहीं है और पार्टी को स्पष्ट रुख अपनाना होगा।
बैठक के अन्य अहम बिंदु
फिलिस्तीन-इस्राइल विवाद
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान कुछ नेताओं ने फिलिस्तीन-इस्राइल संघर्ष का मुद्दा उठाया और कहा कि मोदी सरकार द्वारा निर्दोष नागरिकों की बमबारी पर चुप्पी का जो संक्षिप्त ज़िक्र प्रस्ताव में किया गया है, वह अपर्याप्त है और इसे विस्तार से रखा जाना चाहिए।
सामाजिक न्याय और जातिगत जनगणना
राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय के मुद्दों पर ज़ोर देते हुए जातिगत जनगणना को जरूरी बताया। उन्होंने यह विचार भी खारिज कर दिया कि कांग्रेस केवल दलितों या अल्पसंख्यकों की पार्टी है। पार्टी को सभी वंचित तबकों की आवाज़ बननी चाहिए।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
- शशि थरूर: वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने सुझाव दिया कि कांग्रेस को केवल सरकार की आलोचना नहीं करनी चाहिए, बल्कि रचनात्मक विकल्प भी पेश करने चाहिए।
- मनीष तिवारी: सांसद मनीष तिवारी ने लद्दाख में चीनी घुसपैठ को लेकर गंभीर चिंता जताई। कुछ अन्य नेताओं ने वक्फ बिल पर पार्टी की प्रतिक्रिया को और मज़बूत बनाने की मांग की।
प्रस्ताव में शामिल संभावित बिंदु
- भाजपा-आरएसएस द्वारा कथित 'हिंदू बनाम मुस्लिम' ध्रुवीकरण की राजनीति की आलोचना
- संविधान और संघीय ढांचे पर 'हमले' का मुद्दा
- मोदी सरकार की 'समझौता की गई' विदेश नीति
- भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ
- चीन के साथ रिश्तों और बांग्लादेश में कट्टर राजनीति के उभार का ज़िक्र
प्रस्ताव का मुख्य फोकस:
- सामाजिक न्याय
- जातिगत जनगणना की मांग
- आरक्षण की सीमा बढ़ाने की दिशा में पहल
- मंडल आयोग की सिफारिशों और ओबीसी आरक्षण लागू करने में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका को उजागर करना
- विनिवेश और संविदा रोजगार
- मोदी सरकार पर "डीरिज़र्वेशन" यानी निजीकरण और ठेका प्रणाली के माध्यम से आरक्षण को निष्प्रभावी करने का आरोप
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