भारत-चीन संबंधों में हाल के महीनों में सुधार लेकिन सीमा पर तनाव कम करना अब भी प्राथमिकता: एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत और चीन के बीच पिछले नौ महीनों में द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है, लेकिन सीमा पर तनाव कम करना (de-escalation) अब भी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा..
नयी दिल्ली/बीजिंग। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत और चीन के बीच पिछले नौ महीनों में द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है, लेकिन सीमा पर तनाव कम करना (de-escalation) अब भी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि "मतभेद विवाद न बनें" और "प्रतिस्पर्धा टकराव में न बदले।"
यह जयशंकर की लद्दाख सीमा पर मई 2020 से शुरू सैन्य गतिरोध के बाद चीनी भूमि पर पहली आधिकारिक यात्रा है। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक से एक दिन पहले तियानजिन में हुई।
मुख्य बिंदु: भारत-चीन वार्ता में क्या हुआ
1. सीमा विवाद पर जयशंकर का स्पष्ट रुख
“हमने पिछले नौ महीनों में द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण के लिए अच्छा प्रगति की है। यह सीमा पर टकराव के समाधान और शांति बनाए रखने का परिणाम है। लेकिन अब हमें सीमा से जुड़े अन्य पहलुओं को भी संबोधित करना होगा, खासकर तनाव घटाने (de-escalation) को।”
2. वांग यी को सीधा संदेश
“भारत-चीन संबंधों को दीर्घदृष्टि के साथ संभालना जरूरी है। पिछले साल कज़ान (रूस) में मोदी-शी बैठक के बाद से रिश्तों में सुधार हुआ है। हमें इस गति को बनाए रखना है।”
3. पड़ोसी देशों के रूप में साझा जिम्मेदारी
“प्रतिबंधात्मक व्यापार उपाय और अनावश्यक बाधाएं नहीं होनी चाहिए। हमें लोगों के बीच संपर्क, यात्रा और सीधी उड़ान सेवाएं बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।”
कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू होने पर भारत ने जताया आभार
जयशंकर ने कहा, “हम सराहना करते हैं कि पांच वर्षों के अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है। इसके लिए मैं चीनी पक्ष का धन्यवाद करता हूं।”
आतंकवाद पर SCO में कड़ा संदेश
जयशंकर ने SCO की बैठक से पहले आतंकवाद के मुद्दे पर दो टूक कहा, “आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद SCO की मुख्य चिंता होनी चाहिए। भारत की ज़ीरो टॉलरेंस नीति को हम इस मंच पर भी मजबूत समर्थन की उम्मीद करते हैं।”
यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान को लेकर था, खासकर अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में।
अर्थव्यवस्था और व्यापार: चीन पर प्रतिबंधों की चिंता
भारत ने रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर चीन द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों को उठाया। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, अक्षय ऊर्जा और घरेलू उपकरणों में अहम भूमिका निभाते हैं। चीन वैश्विक आपूर्ति का 90% से अधिक नियंत्रित करता है। भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर इससे प्रभावित हो रहा है।
जयशंकर ने कहा, “ऐसे अवरोधों को हटाना जरूरी है ताकि व्यापारिक साझेदारी आगे बढ़ सके।”
MEA और चीनी विदेश मंत्रालय के बयान
- भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि दोनों पक्षों ने 75वीं वर्षगांठ के मौके पर जन-आधारित संपर्कों को प्राथमिकता देने और सीधी उड़ान सेवाओं व यात्रा की सुविधा बढ़ाने पर सहमति जताई।
- MEA के अनुसार, जयशंकर ने सीमा पर शांति बनाए रखने, सीमा प्रबंधन, और हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
चीन का बयान: “ड्रैगन और हाथी साथ चल सकते हैं”
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, “भारत-चीन संबंध किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं हैं और न ही किसी तीसरे पक्ष को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। हमें विश्वास और सहयोग पर आधारित संबंध विकसित करने चाहिए।”
चीनी बयान में यह भी कहा गया कि दोनों देशों को “ड्रैगन और हाथी का नृत्य” जैसे रूप में साथ रहकर विकास का मार्ग तलाशना चाहिए।
टिप्पणी
जयशंकर की चीन यात्रा से स्पष्ट संकेत गया है कि भारत सीमा विवाद को हल करने और व्यापारिक अवरोधों को हटाने के प्रति गंभीर है। साथ ही, भारत-चीन संबंधों को स्थिर, रचनात्मक और दीर्घकालिक बनाने की इच्छा भी व्यक्त की गई है — लेकिन इसकी बुनियाद सीमा पर शांति और पारस्परिक विश्वास पर ही टिकी रहेगी।
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