भारत को मिलेगा P-8 पोसाइडन निगरानी विमान, चीनी नौसेना की बेहद बारीक गतिविधियों पर भी रखेगा नजर

भारत ने हाल ही में रक्षा क्षेत्र से जुड़े दो अहम समझौतों को मंज़ूरी दी है। पहला समझौता 114 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद से जुड़ा है, जबकि दूसरा सौदा छह P-8 पोसाइडन (P-8I) समुद्री निगरानी विमानों की खरीद..

भारत को मिलेगा P-8 पोसाइडन निगरानी विमान, चीनी नौसेना की बेहद बारीक गतिविधियों पर भी रखेगा नजर
15-02-2026 - 02:15 PM

नयी दिल्ली। भारत ने हाल ही में रक्षा क्षेत्र से जुड़े दो अहम समझौतों को मंज़ूरी दी है। पहला समझौता 114 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद से जुड़ा है, जबकि दूसरा सौदा छह P-8 पोसाइडन (P-8I) समुद्री निगरानी विमानों की खरीद का है।
बोइंग द्वारा निर्मित P-8I पोसाइडन (जो कि P-8A का भारतीय संस्करण है) भारत की सैन्य ताकत बढ़ाने में बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर चीन के साथ चल रहे रणनीतिक टकराव के संदर्भ में। अपनी क्षमताओं के कारण इस विमान को ‘सबमरीन हंटर’ यानी पनडुब्बी शिकारी भी कहा जाता है।

भारत ने वर्ष 2009 में पहली बार आठ P-8I पोसाइडन विमानों का ऑर्डर दिया था। इसके बाद 2016 में चार और विमानों की खरीद की गई। अब छह नए पोसाइडन विमानों के ताज़ा ऑर्डर के साथ भारत, अमेरिका के बाद पोसाइडन का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर बनने की ओर बढ़ रहा है। इसका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और अमेरिका की रणनीतियों पर गहरा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि यह विमान चीन के लिए “सिरदर्द” बनता जा रहा है।

हिंद-प्रशांत में पोसाइडन की बढ़ती मौजूदगी

बोइंग के अनुसार, इस समय दुनिया के नौ देशों में करीब 200 P-8 विमान सेवा में हैं या अनुबंध के तहत हैं। जून 2025 तक 169 P-8 विमानों की डिलीवरी विभिन्न देशों को की जा चुकी है।
अमेरिका के अलावा आठ अन्य देश इस विमान का संचालन करते हैं। इनमें से चार देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आते हैं—भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दक्षिण कोरिया।

भारत के पास फिलहाल 12 पोसाइडन विमान हैं और छह और ऑर्डर पर हैं। ऑस्ट्रेलिया के पास 12 हैं और उसने दो और मंगाए हैं। न्यूज़ीलैंड के पास चार हैं, जबकि दक्षिण कोरियाई नौसेना के पास छह पोसाइडन विमान हैं। इन चारों देशों के पास कुल मिलाकर 42 पोसाइडन विमान होने की संभावना है। इसके अलावा, अमेरिकी पोसाइडन विमान भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तैनात हैं।

चीन क्यों मानता है इसे खतरा?

चीन इस विमान को अपनी पनडुब्बी गतिविधियों के लिए बड़ा खतरा मानता है। बीजिंग का दावा है कि अमेरिका विवादित दक्षिण चीन सागर में पनडुब्बी रोधी P-8A पोसाइडन तैनात कर रहा है।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन को नाराज़ किया है, क्योंकि उन्होंने पोसाइडन विमानों को दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य जैसे उन इलाकों में तैनात किया है, जिन पर चीन अपना दावा करता है।

भारत ने भी चीनी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए इस विमान का इस्तेमाल किया है। समुद्री निगरानी के अलावा, P-8I का उपयोग ज़मीनी इलाकों में खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (ISR) अभियानों के लिए भी किया गया है।
खासतौर पर 2020 के गलवान घाटी संघर्ष और 2017 के डोकलाम गतिरोध के दौरान चीन की गतिविधियों पर नज़र रखने में इसका अहम इस्तेमाल हुआ था।

P-8 पोसाइडन की प्रमुख खूबियां

P-8 पोसाइडन को बोइंग डिफेंस स्पेस एंड सिक्योरिटी ने विकसित किया है। यह एक बहुउद्देश्यीय समुद्री गश्ती विमान है, जो पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह युद्ध, खुफिया निगरानी, टोही और खोज-बचाव अभियानों में बेहद उपयोगी है। P-8I संस्करण का इस्तेमाल तटीय निगरानी के लिए भी किया जाता है।

लंबी दूरी तक गश्त की क्षमता

इस विमान की अधिकतम रेंज 1,200 नॉटिकल मील है और यह लगातार 10 घंटे तक ऑपरेशन कर सकता है। इससे यह हिंद महासागर या दक्षिण चीन सागर जैसे विशाल क्षेत्रों में लंबी दूरी की गश्त कर सकता है।
इसमें आधुनिक निगरानी और टोही उपकरण लगे हैं, जिनमें लॉन्ग-रेंज X-बैंड रडार शामिल है, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर समुद्री लक्ष्यों का पता लगा सकता है।

पोसाइडन में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, हाई-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर लगे हैं। इसके अलावा इसमें AN/APY-10 मल्टी-मोड रडार है, जिसमें सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) और इनवर्स क्षमताएं शामिल हैं। यह हर मौसम में पनडुब्बियों, सतही जहाज़ों और ज़मीनी लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम है।

मिसाइल और हथियार क्षमता

इस विमान की एक बड़ी खासियत यह है कि यह समुद्र के नीचे छिपी पनडुब्बियों का पता चुंबकीय असामान्यताओं के ज़रिये लगा सकता है। यह चीन के तेजी से बढ़ते पनडुब्बी बेड़े पर नज़र रखने के लिए बेहद अहम है।
यह विमान 120 से ज्यादा सोनार बॉय (sonobuoys) ले जा सकता है, जिनकी मदद से दुश्मन पनडुब्बियों की पहचान और ट्रैकिंग की जाती है।

P-8A पोसाइडन में समुद्री लक्ष्यों पर सटीक हमले के लिए एयर-टू-सर्फेस मिसाइलें और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए टॉरपीडो लगे होते हैं। यह 30,000 फीट की ऊंचाई से MK-54 टॉरपीडो को ग्लाइड बम की तरह छोड़कर पनडुब्बियों पर हमला करने में भी सक्षम है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।