"न्याय नहीं मिला, अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे": मालेगांव विस्फोट पीड़ितों के परिजनों की पीड़ा
वर्ष 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में विशेष NIA अदालत द्वारा सातों आरोपियों को बरी किए जाने के बाद, पीड़ित परिवारों में भारी असंतोष है। 10 वर्षीय फरीन के पिता लियाकत शेख, जिनकी बेटी इस धमाके की सबसे छोटी शिकार थी, ने गुरुवार को कहा कि यह फैसला अस्वीकार्य है..
मालेगांव। वर्ष 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में विशेष NIA अदालत द्वारा सातों आरोपियों को बरी किए जाने के बाद, पीड़ित परिवारों में भारी असंतोष है। 10 वर्षीय फरीन के पिता लियाकत शेख, जिनकी बेटी इस धमाके की सबसे छोटी शिकार थी, ने गुरुवार को कहा कि यह फैसला अस्वीकार्य है और जरूरत पड़ी तो वे सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
67 वर्षीय लियाकत शेख ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी बेटी की तस्वीर दिखाते हुए कहा,"अदालत का फैसला गलत है। हम सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे, न्याय पाने के लिए।"
"वड़ा-पाव लेने गई थी फरीन, फिर कभी नहीं लौटी"
लियाकत शेख, जो उस समय ड्राइवर की नौकरी करते थे, ने उस दिन को याद करते हुए कहा,"29 सितंबर 2008 की शाम को फरीन वड़ा-पाव लेने भिक्कू चौक गई थी। तभी धमाके की आवाज आई। हमारा घर धमाके की जगह के पास था, टीन की छत थी। धमाके के बाद छत पर छर्रे गिरे थे। मैं फरीन को ढूंढने गया, लेकिन अंधेरा था। किसी ने कहा कि एक लड़की घायलों में है। मैं और मेरी पत्नी अस्पताल भागे। वहां फरीन बहुत बुरी हालत में मिली।"
"हेमंत करकरे ने पुख्ता सबूतों के साथ की थी गिरफ्तारी"
लियाकत शेख ने कहा कि तत्कालीन ATS प्रमुख हेमंत करकरे ने आरोपियों को मजबूत सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अब भी कोई दोषी नहीं है, तो फिर उनकी बेटी की जान किसने ली?
अन्य परिजनों की भी प्रतिक्रिया
निसार अहमद, जिनके बेटे सैयद अज़हर की धमाके में मौत हुई थी, ने कहा,"हमें न्याय नहीं मिला। हम उच्च न्यायालयों में अपील करेंगे। चाहे किसी भी धर्म का हो, धमाके के पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए।"
उस्मान खान, जिनके भतीजे इरफान खान (22) की मौत हुई, ने कहा, "इरफान ऑटो चलाता था। भिक्कू चौक पर चाय पीने गया था, तभी धमाका हुआ। पहले उसे मालेगांव के एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर नासिक और अंत में मुंबई के जेजे अस्पताल, जहां 10 घंटे इलाज के बाद उसकी मौत हो गई।"
उन्होंने फैसले पर नाराज़गी जताते हुए कहा,"पहले कुछ मुस्लिम युवकों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया, बाद में वे बरी हो गए। अब ये लोग भी दोषमुक्त हो गए। तो आखिर असली दोषी कौन है?"
कानूनी अपील की तैयारी
पीड़ित परिवारों की ओर से वकील शाहिद नदीम ने बताया कि वे स्वतंत्र अपील दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि यह फैसला पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है और अब ऊपरी अदालतों से न्याय की उम्मीद की जा रही है।
पृष्ठभूमि
2008 के मालेगांव धमाके में 6 लोगों की मौत और 101 घायल हुए थे। 17 साल चली सुनवाई के बाद मुंबई की विशेष NIA अदालत ने सभी सात आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, जिनमें प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित शामिल हैं।
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