“कश्मीरी पंडितों का इस्तेमाल सिर्फ़ राजनीति के लिए हुआ, पीएम और गृह मंत्री ने एक बार भी उनके कैंप का दौरा नहीं किया”.. भाजपा नेता का अपनी ही पार्टी पर आरोप
भाजपा के असंतुष्ट नेता जहानज़ैब सिरवाल ने रविवार, 19 अक्टूबर 2025 को अपनी ही पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया है, लेकिन अब तक उनकी दशकों पुरानी पीड़ा को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया..
नयी दिल्ली। भाजपा के असंतुष्ट नेता जहानज़ैब सिरवाल ने रविवार, 19 अक्टूबर 2025 को अपनी ही पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया है, लेकिन अब तक उनकी दशकों पुरानी पीड़ा को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे
सिरवाल, जिन्होंने पिछले साल अप्रैल में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था, ने कहा “यह समुदाय भाजपा का सबसे मज़बूत समर्थक रहा है, लेकिन इसकी भूमिका को न तो मान्यता दी गई और न ही सम्मान। भाजपा नेतृत्व ने संसद में इनके दर्द का ज़िक्र 500 से ज़्यादा बार किया, पर वह सिर्फ़ राजनीतिक लाभ के लिए था — हर विरोधी पर वार करने के लिए इसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं पार्टी नेतृत्व से आग्रह करता हूँ कि कश्मीरी पंडित समुदाय के साथ दशकों से हो रहे अन्याय को दूर करने के लिए ठोस और अर्थपूर्ण कदम उठाए जाएँ। अब सिर्फ़ औपचारिक घोषणाएँ या संसदीय चर्चाओं में नाम लेने से काम नहीं चलेगा।”
पहले भी दिया था इस्तीफ़े का अल्टीमेटम
सिरवाल ने इससे पहले 3 अक्टूबर को भाजपा से इस्तीफ़ा देने की चेतावनी दी थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुसलमानों को लेकर दिए “अस्वीकार्य” बयान और राज्य पुलिस के “प्रतिशोधी रवैये” को लेकर आपत्ति जताई थी।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व को ऐसी नीतियों पर ध्यान देना चाहिए, जो कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी, उनके अधिकारों की बहाली, और सुरक्षा व रोज़गार के अवसर सुनिश्चित करें, जिनसे वे लंबे समय से वंचित हैं।
सिरवाल ने अपने बयान में कहा,“उन्हें अब प्रतीकात्मक कदमों नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की ज़रूरत है। यह कार्रवाई वरिष्ठ नेताओं के उनके शिविरों में जाकर उनकी स्थिति देखने से शुरू होनी चाहिए। उसके बाद समुदाय के प्रतिनिधियों और पार्टी सदस्यों को शामिल करते हुए उनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।”
“मोदी-शाह ने अब तक एक बार भी शिविरों का दौरा नहीं किया”
सिरवाल ने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय की स्थिति बेहद चिंताजनक है और इस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शीर्ष नेतृत्व — प्रधानमंत्री या गृह मंत्री ने अब तक एक बार भी उनके कैंपों का दौरा नहीं किया और उनकी दयनीय परिस्थितियों को अपनी आँखों से नहीं देखा।”
उन्होंने कहा कि इन शिविरों में न तो उचित आवास है, न स्वास्थ्य सेवाएँ, और न ही सामाजिक या आर्थिक प्रगति के अवसर। सिरवाल ने कहा कि ये शिविर “तीन दशकों से चली आ रही मानवीय त्रासदी को दूर करने में असफलता का प्रतीक हैं।”
“कश्मीर वापसी और पुनर्वास की ईमानदार कोशिश होनी चाहिए”
सिरवाल ने आगे कहा कि समुदाय का दर्द इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि उनकी सुरक्षित कश्मीर वापसी सुनिश्चित नहीं की गई और पुनर्वास के लिए ईमानदार संवाद या ठोस योजना भी नहीं बनी।
उन्होंने कहा, “यह उपेक्षा न सिर्फ़ उस समुदाय का अपमान है, जिसने कठिन परिस्थितियों में पार्टी का साथ दिया, बल्कि यह उन सिद्धांतों — न्याय, समावेशिता और करुणा — को भी कमजोर करती है, जिनका भाजपा दावा करती है।”
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