भारत को समझने की कमी: अल्पसंख्यकों पर डच प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर MEA सचिव सिबी जॉर्ज का पलटवार
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव (पश्चिम) Sibi George ने भारत में अल्पसंख्यकों के कथित हालात को लेकर डच प्रधानमंत्री Rob Jetten द्वारा उठाई गई चिंताओं को सख्ती से खारिज कर..
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के सचिव (पश्चिम) Sibi George ने भारत में अल्पसंख्यकों के कथित हालात को लेकर डच प्रधानमंत्री Rob Jetten द्वारा उठाई गई चिंताओं को सख्ती से खारिज कर दिया।
Breaking: Amb. Sibi George responds to Dutch PM's statement of concern on Indian minorities
"These questions show a lack of understanding about India. Jews never faced persecution here. We have 30 million Christians. Islam flourished. Attacked minorities have always come here." pic.twitter.com/vAaHhuCmmE — Shashank Mattoo (@MattooShashank) May 17, 2026
यह कूटनीतिक जवाब शनिवार को हेग में सामने आया, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नीदरलैंड की अपनी बहु-देशीय यात्रा का चरण पूरा किया। द्विपक्षीय शिखर वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए राजदूत सिबी जॉर्ज ने डच प्रधानमंत्री की टिप्पणियों को भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना की “गलत समझ” करार दिया।
‘भारत में इस्लाम फला-फूला, यहूदियों पर कभी अत्याचार नहीं हुआ’
सिबी जॉर्ज ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सदियों से दुनिया भर के उत्पीड़ित समुदायों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल रहा है।
उन्होंने कहा, “ये सवाल भारत को समझने की कमी को दिखाते हैं। यहां यहूदियों पर कभी अत्याचार नहीं हुआ। हमारे यहां 3 करोड़ ईसाई हैं। भारत में इस्लाम फला-फूला। दुनिया भर में प्रताड़ित अल्पसंख्यक हमेशा यहां आकर बसे हैं।”
कूटनीतिक तनाव उस समय उभरा जब बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान रॉब जेटन ने दक्षिण एशिया में मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी पश्चिमी संस्थाओं की रिपोर्टों का उल्लेख किया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल के करीबी अधिकारियों के अनुसार, नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साझेदारियों के लिए खुली है, लेकिन वह अपने आंतरिक मामलों में बाहरी “नैतिक उपदेश” या हस्तक्षेप का लगातार विरोध करती है।
तनाव के बावजूद व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
हालांकि अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच कुछ समय के लिए बयानबाजी हुई, लेकिन दोनों देशों ने जल्दी ही विवाद को अलग रखते हुए 27.8 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार और स्वच्छ ऊर्जा तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।
भारत और नीदरलैंड के संबंधों को औपचारिक रूप से “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा दिया गया।
17 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 17 अहम समझौतों और समझौता ज्ञापनों (MoUs) को अंतिम रूप दिया, जिनका उद्देश्य नई रणनीतिक साझेदारी को संस्थागत रूप देना है।
सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक समझौता Tata Electronics और डच सेमीकंडक्टर कंपनी ASML के बीच हुआ। इसके तहत गुजरात के धोलेरा में स्थापित होने वाली भारत की नई सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट को सहयोग दिया जाएगा। यह भारत के साथ ASML की पहली प्रत्यक्ष तकनीकी साझेदारी मानी जा रही है।
दोनों देशों ने 2026–2030 के लिए पांच वर्षीय “रोडमैप ऑन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” और ग्रीन हाइड्रोजन सहयोग पर विशेष रोडमैप को भी मंजूरी दी।
इसके अलावा कई अन्य समझौते भी हुए, जिनमें गुजरात की कल्पसर जल प्रबंधन परियोजना पर तकनीकी सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और भारतीय तथा डच बंदरगाहों के बीच लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी को मजबूत करना शामिल है।
भारत को लौटाई गई ऐतिहासिक धरोहर
इस दौरे का एक सांस्कृतिक पहलू भी रहा। डच सरकार ने भारत की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर लौटाने की प्रक्रिया पूरी की। इसके तहत चोल काल की 24 ऐतिहासिक ताम्रपत्र शिलालेख भारतीय प्रतिनिधिमंडल को सौंपे गए, जिनमें तत्कालीन शाही फरमान दर्ज हैं।
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