माघ मेला विवाद गहराया, अयोध्या के संत ने शंकराचार्य को नगर में प्रवेश न करने की चेतावनी दी

माघ मेले से जुड़ा विवाद और गहरा गया है। अयोध्या के एक प्रमुख संत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को चेतावनी दी है कि जब तक वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दिए गए अपने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने..

माघ मेला विवाद गहराया, अयोध्या के संत ने शंकराचार्य को नगर में प्रवेश न करने की चेतावनी दी
05-02-2026 - 10:48 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

माघ मेले से जुड़ा विवाद और गहरा गया है। अयोध्या के एक प्रमुख संत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को चेतावनी दी है कि जब तक वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दिए गए अपने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। यह बयान उस बड़े विवाद के बीच आया है, जिसके केंद्र में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हैं, जिन्हें प्रयागराज में माघ मेले के दौरान संगम में पवित्र स्नान करने से रोके जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।

अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी के प्रमुख जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, “अब अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।” उन्होंने शंकराचार्य पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ “अपमानजनक” टिप्पणियां करने का आरोप लगाया। परमहंस आचार्य ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध तब तक लागू रहेगा, जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांग लेते। उन्होंने दोहराते हुए कहा, “जब तक वे योगी से माफी नहीं मांगते, उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।”

विवाद की शुरुआत माघ मेले से

यह विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में सवार होकर संगम—गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम—पर पवित्र स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भारी भीड़ का हवाला देते हुए घाटों के पास उनकी पालकी को रोक दिया और उनसे अन्य श्रद्धालुओं की तरह पैदल जाकर स्नान करने को कहा।

शंकराचार्य ने इसे परंपरागत प्रोटोकॉल और अपने धार्मिक पद की गरिमा का “अपमान” बताया और इसके विरोध में करीब 10 दिनों तक धरना दिया। इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच संक्षिप्त झड़प भी हुई। वहीं, माघ मेला प्रशासन का कहना था कि यह कदम केवल भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा कारणों से उठाया गया था।

बिना स्नान किए लौटे शंकराचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 28 जनवरी को बिना पवित्र स्नान किए माघ मेला परिसर से चले गए। जाते समय उन्होंने कहा कि वे “भारी मन” से वहां से लौट रहे हैं।

अधिकारियों का आरोप है कि शंकराचार्य के समर्थकों ने एक पांटून पुल पर बैरिकेड तोड़ दिया और घाटों की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिससे भारी भीड़ को संभाल रही पुलिस के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गईं। इसके बाद प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की उपाधि किस आधार पर उपयोग कर रहे हैं। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक सिविल अपील का भी हवाला दिया गया, जिसके चलते कुछ नियुक्तियों पर रोक लगी हुई है।

कालनेमि’ टिप्पणी से बढ़ा विवाद

विवाद ने तब और तीखा मोड़ ले लिया, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना शंकराचार्य का नाम लिए लोगों को “कालनेमि” से सावधान रहने को कहा। रामायण में कालनेमि एक ऐसा राक्षस था, जो साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश करता है।

इस पर पलटवार करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी कि वे 40 दिनों के भीतर उत्तर प्रदेश में गोहत्या और बीफ निर्यात पर रोक लगाएं तथा गाय को “राष्ट्र माता” घोषित करें, ताकि वे खुद को “हिंदू हितैषी” साबित कर सकें।

उन्होंने कहा, “मैं 11 दिन तक वहां बैठा रहा, लेकिन किसी अधिकारी ने मुझसे स्नान करने को नहीं कहा। अब बहुत देर हो चुकी है। मैं अगले साल माघ मेले में जाऊंगा और सम्मानपूर्वक स्नान करूंगा। हमारी प्रमाणिकता पर सवाल उठाए गए और हमने अपने दस्तावेज जमा किए। अब आपको यह प्रमाण देना होगा कि आप हिंदू हितैषी हैं।”

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि शंकराचार्य पद के अन्य दावेदारों के शिविरों को मेले में अनुमति क्यों दी गई, जबकि उनकी स्थिति की जांच की गई।

संत समाज में बढ़ती दरार

दोनों पक्षों के पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। संगम में एक धार्मिक स्नान को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब संत समाज के भीतर गहरी दरार पैदा करने का खतरा बन गया है और उत्तर प्रदेश में आस्था और सत्ता के जटिल संबंधों पर लगातार ध्यान खींच रहा है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।