Mahakal Mandir : मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर व भव्य मंदिर बनकर हुआ तैयार, आज करेंगे प्रधानमंत्री उद्घाटन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, मंगलवार 11 अक्टूबर को मध्य प्रदेश की उज्जैन नगरी में महाकाल कॉरिडोर के पहले चरण का लोकार्पण करने जा रहे हैं। लोकार्पण पर शहर के मंदिरों में सीधा प्रसारण होगा । दीपोत्सव के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान भी होंगे । महाकाल कॉरिडोर के लोकार्पण को लेकर तैयारियां पूर्ण हो चुकी है। इंदौर सहित उज्जैन के सभी मुख्य मंदिरों पर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से मंदिर में Mahakal Lok कॉरिडोर के लोकार्पण का लाइव प्रसारण भी दिखाया जाएगा। इस कॉरिडोर के प्रति उत्साह को देखते हुए उज्जैन में 30 से भी अधिक स्थानों पर इस आयोजन का लाइव प्रसारण दिखाने का प्रबंध किया गया है। साथ ही हर मंदिर में दीप उत्सव जैसा माहौल रहेगा। आकर्षक साज-सज्जा के साथ मंदिरों में भव्य महाआरती, धार्मिक अनुष्ठान के साथ घर-घर दीप जलाए जाएंगे। लोकार्पण में शामिल होने के लिए घर-घर न्योता भी दिया गया है।
अब जानते हैं महाकाल कॉरिडोर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें
• दो भव्य प्रवेश द्वार बलुआ पत्थरों से बने जटिल नक्काशीदार 108 अलंकृत स्तंभों की एक आलीशान स्तम्भावली, फव्वारों और शिव पुराण की कहानियों को दर्शाने वाले 50 से अधिक भित्ति-चित्रों की एक श्रृंखला इस नवनिर्मित 'Mahakal Lok' की शोभा बढ़ाएंगे.
• महाकाल की नगरी में 900 मीटर से अधिक लंबा भारत में अब तक निर्मित ऐसे सबसे बड़े गलियारों में से एक है. यह कॉरिडोर पुरानी रुद्रसागर झील के पास है, जिसे प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर के आसपास पुनर्विकास परियोजना के हिस्से के रूप में भी पुनर्जीवित किया गया है.
• दो राजसी प्रवेश द्वार- नंदी द्वार और पिनाकी द्वार - जो 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है प्राचीन महाकालेश्वर मंदिर के प्रवेश द्वार तक जाते हैं और रास्ते भर सौंदर्य के दृश्य प्रस्तुत करते हैं.
• कॉरिडोर की शोभा बढ़ाने वाली संरचनायें,राजस्थान में बंसी पहाड़पुर क्षेत्र से प्राप्त बलुआ पत्थरों द्वारा निर्मित हैं जिन्हे राजस्थान, गुजरात और ओडिशा के कलाकारों और शिल्पकारों ने मुख्य रूप से पत्थरों को तराशकर और उन्हें अलंकृत कर सौंदर्य स्तंभों और पैनल में तब्दील किया है.
• इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य प्राचीन मंदिर वास्तुकला के उपयोग के माध्यम से "ऐतिहासिक शहर उज्जैन के प्राचीन गौरव पर जोर देना और इसे वापस लाना है."
• कॉरिडोर में लगाए गए हैं रुद्राक्ष और कदम्ब के पौधे। कालिदास के अभिज्ञान शकुंतलम में वर्णित बागवानी प्रजातियों के पौधों को कॉरिडोर में लगाया गया है। उज्जैन स्मार्ट सिटी परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार पाठक ने बताया कि धार्मिक महत्व वाली लगभग 40-45 ऐसी प्रजातियों का उपयोग किया गया है, जिनमें रुद्राक्ष, बकुल, कदम्ब, बेलपत्र, सप्तपर्णी शामिल हैं." उज्जैन, पुरानी क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित, एक प्राचीन शहर है जिसे पहले उज्जयनी और अवंतिका के नाम से भी जाना जाता था और यह शहर राजा विक्रमादित्य की कथा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उस प्राचीनता को दोबारा पुनर्जीवित नहीं कर सकती जो सदियों पहले थी लेकिन हमने कॉरिडोर में स्तंभों और अन्य संरचनाओं के निर्माण में उपयोग की जाने वाली पुरानी, सौंदर्य वास्तुकला के माध्यम से उस गौरव को फिर से वापस लाने का प्रयास किया है।"
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