आरपीएससी सदस्य मंजू शर्मा का इस्तीफा, हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद उठाया कदम
जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सदस्य और कवि कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला उन्होंने उस समय लिया जब राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में 2021 सब-इंस्पेक्टर भर्ती रद्द करते हुए उनके साथ अन्य सदस्यों पर गंभीर टिप्पणियाँ की थीं।
गवर्नर हरिभाऊ बागड़े को सोमवार को लिखे अपने पत्र में शर्मा ने कहा, “मैंने अपने पूरे कार्यकाल और व्यक्तिगत जीवन में हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी से काम किया है लेकिन हाल ही में एक भर्ती प्रक्रिया में विवाद के चलते मेरी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और आयोग की गरिमा को ठेस पहुँची है।”
उन्होंने लिखा, “किसी भी पुलिस या जांच एजेंसी में मेरे खिलाफ कोई जांच लंबित नहीं है और न ही मैं कभी किसी मामले में अभियुक्त रही हूँ। इसके बावजूद, सार्वजनिक जीवन की पवित्रता के पक्ष में रहते हुए और आयोग की गरिमा, निष्पक्षता तथा पारदर्शिता को सर्वोपरि मानते हुए मैं स्वेच्छा से इस्तीफा दे रही हूँ।”
हाईकोर्ट की टिप्पणियाँ
28 अगस्त के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि शर्मा समेत कई सदस्यों ने परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता किया। कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा था कि..
- “पेपर लीक और इंटरव्यू प्रक्रिया में हेरफेर में सक्रिय भागीदारी या जानकारी रखते हुए आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा, रामूराम रैका, मंजू शर्मा, संगीता आर्य, जसवंत राठी और चेयरमैन संजय श्रोत्रिय ने परीक्षा की साख को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाया।”
कोर्ट ने इसे “चौंकाने वाला” बताते हुए कहा था कि कई सदस्यों की “सक्रिय मिलीभगत और संलिप्तता” सामने आई है। आरोपपत्र में भी दर्ज है कि इन सदस्यों को निजी लाभ के लिए हो रहे लेन-देन और गड़बड़ियों की पूरी जानकारी थी।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया था कि पूर्व सदस्य रामूराम रैका ने अपने बच्चों के इंटरव्यू को लेकर मंजू शर्मा, संगीता आर्य और जसवंत राठी से बातचीत की थी। इससे आयोग में “व्यवस्थित भ्रष्टाचार” और लिखित व इंटरव्यू दोनों चरणों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा।
पृष्ठभूमि और विवादित नियुक्ति
मंजू शर्मा के पास भूगोल में एमए और पीएचडी की डिग्री है। वह पहले भरतपुर स्थित एमएसजे पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर थीं।
उनकी नियुक्ति (अक्टूबर 2020) भी विवादों में घिरी रही थी। उस समय अशोक गहलोत सरकार की आलोचना हुई थी क्योंकि कुमार विश्वास कांग्रेस नेतृत्व के कट्टर आलोचक रहे हैं और 2014 में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके थे।
आरपीएससी सदस्य का कार्यकाल छह साल का होता है और शर्मा की नियुक्ति अक्टूबर 2026 तक के लिए हुई थी। लेकिन, अब उन्होंने हाईकोर्ट की टिप्पणियों और विवादों के बीच पद छोड़ने का फैसला किया है।
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