चिकन नेक के पास भारत-भूटान रेल कनेक्टिविटी की बड़ी शुरुआत, पहली बार रेल से जुड़ेगा भूटान
भारत ने सोमवार को भूटान के साथ दो नई रेल परियोजनाओं की शुरुआत की घोषणा की। यह भूटान का किसी भी देश से पहला रेल संपर्क होगा। दोनों परियोजनाएँ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के पास शुरू की जा रही हैं, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली जीवनरेखा..
नयी दिल्ली। भारत ने सोमवार को भूटान के साथ दो नई रेल परियोजनाओं की शुरुआत की घोषणा की। यह भूटान का किसी भी देश से पहला रेल संपर्क होगा। दोनों परियोजनाएँ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के पास शुरू की जा रही हैं, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली जीवनरेखा है।
दो रेल परियोजनाएँ
- कोकराजार (असम)–गेलफू (भूटान): 69 किमी लंबी इस लाइन पर करीब ₹3,456 करोड़ की लागत आएगी और इसे चार साल में पूरा किया जाएगा।
- बनरहाट (प. बंगाल)–सामतसे (भूटान): 20 किमी लंबी इस परियोजना की लागत ₹577 करोड़ है और इसे तीन साल में तैयार किया जाएगा।
कुल ₹4,033 करोड़ की लागत वाली इन दोनों परियोजनाओं को भारत सरकार पूरी तरह वित्तपोषित करेगी।
भूटान को पहली बार मिलेगा रेल संपर्क
भूटान पहली बार किसी देश से रेल मार्ग से जुड़ेगा। गेलफू को Mindfulness City और सामतसे को औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। रेल संपर्क से पर्यटन, खनिज निर्यात और औद्योगिक उत्पादों के व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी।
लंबा इंतज़ार, अब साकार
भारत-भूटान के बीच रेल लिंक पर चर्चा की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत में हुई थी। 2005 में दोनों देशों के बीच पांच रेल मार्गों पर समझौता हुआ था, लेकिन परियोजना को गति 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा के दौरान मिली, जब कोकराजार–गेलफू और बनरहाट–सामतसे मार्गों पर सहमति बनी।
रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से अहम
चिकन नेक के पास होने के कारण यह रेल संपर्क भूटान और भारत के लिए भूराजनैतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डोकलाम गतिरोध जैसी स्थितियों में यह संपर्क आपूर्ति शृंखला और सैन्य रसद के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। इससे न केवल पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी मजबूत होगी बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
भारत-भूटान संबंधों में नया अध्याय
भारत पहले ही नेपाल और बांग्लादेश के साथ रेल कनेक्टिविटी बढ़ा चुका है। अब भूटान से रेल संपर्क दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय जोड़ेगा। यह पहल व्यापार, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के संबंधों को और गहरा करेगी।
यह कदम भारत की सीमा और पूर्वोत्तर अवसंरचना को मजबूत करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिससे आर्थिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी नई धार मिलेगी।
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