आरबीआई मौद्रिक नीति: शेयरों पर लोन की सीमा 5 गुना बढ़कर 1 करोड़ रुपये, IPO फाइनेंसिंग भी हुई महंगी
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी द्वैमासिक मौद्रिक नीति पेश की। इसमें ब्याज दरों को यथावत रखते हुए ऋण प्रवाह बढ़ाने, बैंकिंग क्षेत्र को मज़बूत करने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए कई अहम कदम उठाए..
मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी द्वैमासिक मौद्रिक नीति पेश की। इसमें ब्याज दरों को यथावत रखते हुए ऋण प्रवाह बढ़ाने, बैंकिंग क्षेत्र को मज़बूत करने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए कई अहम कदम उठाए गए।
1. शेयरों और आईपीओ पर लोन
आरबीआई ने शेयरों के बदले दिए जाने वाले बैंक ऋण की सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर प्रति उधारकर्ता 1 करोड़ रुपये कर दिया है।
इसी तरह, आईपीओ फाइनेंसिंग की सीमा भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये प्रति व्यक्ति कर दी गई है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "इन कदमों का उद्देश्य व्यक्तियों और कारोबारियों के लिए ऋण की उपलब्धता आसान बनाना है, साथ ही हमारी नियामकीय व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालना है।"
2. डेट सिक्योरिटीज पर लोन
आरबीआई ने सूचीबद्ध डेट सिक्योरिटीज के बदले दिए जाने वाले ऋण पर लगी नियामकीय सीमा हटाने का प्रस्ताव किया है। इससे कॉरपोरेट और हाई-नेटवर्थ व्यक्तियों को बैंक से आसानी से क्रेडिट उपलब्ध हो सकेगा।
यह कदम आरबीआई की पांच-आयामी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें शामिल हैं..
- बैंकों की प्रतिस्पर्धा और लचीलापन मज़बूत करना
- विदेशी मुद्रा प्रबंधन को सरल बनाना
- उपभोक्ता संतुष्टि बढ़ाना
- कारोबार में आसानी को प्रोत्साहन देना
- भारतीय रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना
3. ब्याज दरें अपरिवर्तित
आरबीआई ने रेपो रेट 5.50% पर यथावत रखी है।
- शॉर्ट-टर्म लेंडिंग फैसिलिटी (STF) दर: 5.25%
- मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) और बैंक रेट: 5.75%
यह लगातार दूसरी बार है जब नीति दरों में बदलाव नहीं किया गया।
इससे पहले फरवरी, अप्रैल और जून में तीन बार दरों में कटौती हुई थी, जिससे रेपो रेट 6.5% से घटकर 5.5% हो गया था।
4. विकास और महंगाई का अनुमान
- GDP ग्रोथ (FY26): 6.8% (पहले 6.5%)
- खुदरा महंगाई (FY26): 2.6% (पहले 3.1%)
- कोर इन्फ्लेशन: लगभग 4%
- FY27 में खाद्य मूल्य सामान्य होने पर महंगाई धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना
आरबीआई ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई लक्ष्य 4% ±2% की सीमा पर कायम रखा है। अगस्त 2025 में खुदरा महंगाई 2.07% के छह साल के निचले स्तर पर रही।
5. वैश्विक और घरेलू कारक
- अमेरिका की टैरिफ नीतियाँ और H-1B वीज़ा शुल्क वृद्धि भारत के निर्यात, नौकरी बाज़ार और रेमिटेंस पर असर डाल सकती हैं।
- हालिया जीएसटी दर तर्कसंगतीकरण महंगाई घटाने और खपत बढ़ाने में मदद करेगा, लेकिन टैरिफ़ से FY26 की दूसरी छमाही में विकास दर धीमी पड़ सकती है।
6. बैंकिंग और क्रेडिट प्रवाह
इन नीतिगत कदमों का उद्देश्य..
- बैंकों और ऑल इंडिया फ़ाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (AIFIs) के पूंजी ढांचे को मज़बूत करना
- खुदरा निवेशकों को शेयरों व आईपीओ पर आसान ऋण उपलब्ध कराना
- कॉरपोरेट को डेट सिक्योरिटीज के ज़रिए पूंजी जुटाने का विकल्प देना
आरबीआई ने इसके साथ 22 अतिरिक्त पहलें भी शुरू की हैं, जो बैंकिंग दक्षता, रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण और कारोबार सुगमता को बढ़ावा देंगी।
7. बाज़ार और अर्थव्यवस्था पर असर
विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई की तटस्थ नीति और जीडीपी अनुमानों में बढ़ोतरी से..
- वित्तीय बाज़ारों में स्थिरता और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा
- कॉरपोरेट और खुदरा निवेशकों की उधारी क्षमता बढ़ेगी
- इक्विटी और आईपीओ सेगमेंट में खपत और निवेश की धारणा मज़बूत होगी
समग्र रूप से, आरबीआई की मौद्रिक नीति विकास समर्थन, मूल्य स्थिरता और क्रेडिट प्रवाह को संतुलित करती है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि अगर महंगाई या विकास परिदृश्य में बड़ा बदलाव होता है तो आरबीआई उचित कदम उठाने के लिए तैयार है।
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