तेल नहीं, पैसा नहीं, परेड नहीं: खाड़ी तेल संकट के बीच पाकिस्तान में ‘ब्लैकआउट जैसे’ हालात, 23 मार्च के गणतंत्र दिवस समारोह रद्द
Pakistan ने 23 मार्च को मनाए जाने वाले अपने राष्ट्रीय दिवस (गणतंत्र दिवस) पर होने वाली सैन्य परेड और उससे जुड़े सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के कार्यालय ने बताया कि यह फैसला खाड़ी क्षेत्र में तेल संकट और सरकार द्वारा किए जा रहे खर्च में कटौती के चलते..
इस्लामाबाद। Pakistan ने 23 मार्च को मनाए जाने वाले अपने राष्ट्रीय दिवस (गणतंत्र दिवस) पर होने वाली सैन्य परेड और उससे जुड़े सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के कार्यालय ने बताया कि यह फैसला खाड़ी क्षेत्र में तेल संकट और सरकार द्वारा किए जा रहे खर्च में कटौती के चलते लिया गया है।
क्यों रद्द किए गए 23 मार्च के समारोह?
पाकिस्तान हर साल 23 मार्च को अपना गणतंत्र दिवस मनाता है। लेकिन इस बार मध्य पूर्व में जारी युद्ध और अशांति के कारण तेल आपूर्ति में बाधा आई है। देश पहले से ही आर्थिक मंदी से जूझ रहा है, ऐसे में सरकार ने सार्वजनिक खर्च में भारी कटौती का फैसला किया है, ताकि आर्थिक स्थिति को संभाला जा सके और ऊर्जा संकट से प्रभावित लोगों को राहत दी जा सके।
‘ब्लैकआउट जैसे’ संकट की वजह क्या है?
सरकार के बयान के अनुसार, खाड़ी तेल संकट और सख्त मितव्ययिता (austerity) उपायों के कारण 23 मार्च की परेड और उससे जुड़े सभी समारोह आयोजित नहीं किए जाएंगे। तेल आपूर्ति में बाधा ने देश की ऊर्जा स्थिति को बेहद कमजोर कर दिया है।
सरकार ने कौन-कौन से आपात कदम उठाए?
सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों को निर्देश दिया है कि वे इस दिन को सादगी और गरिमा के साथ मनाएं, ताकि सीमित कार्यक्रमों के बावजूद इस दिन का महत्व बना रहे।
साथ ही कई कड़े कदम उठाए गए हैं..
- वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) को फिर से लागू किया गया
- स्कूल और कॉलेज पूरे देश में बंद
- सरकारी वाहनों की आवाजाही सीमित
- वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के विदेश दौरे पर रोक
- उच्च पदस्थ नेताओं और अधिकारियों के वेतन में कटौती
इतिहास के लिहाज से क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 23 मार्च 1940 को Lahore Resolution पारित हुआ था, जिसने अलग मुस्लिम राष्ट्र की मांग को औपचारिक रूप दिया। इसी के परिणामस्वरूप भारत का विभाजन हुआ।
इसके बाद 23 मार्च 1956 को पाकिस्तान ने अपना पहला संविधान अपनाया और एक इस्लामिक गणराज्य बना। आमतौर पर इस दिन Islamabad में भव्य सैन्य परेड आयोजित होती है।
संकट का सबसे ज्यादा असर कहां?
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और खासतौर पर Strait of Hormuz के बंद होने की खबरों ने पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे देश में ‘ब्लैकआउट जैसे’ हालात पैदा हो गए हैं।
आर्थिक और आम जनता पर असर
ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने हालात और खराब कर दिए हैं..
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि
- परिवहन लागत में बढ़ोतरी
- खाद्य पदार्थों के दाम में उछाल
- मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
रमजान के महीने में यह बढ़ोतरी लोगों के लिए और ज्यादा मुश्किलें खड़ी कर रही है, क्योंकि इस समय घरेलू खर्च पहले से ही बढ़ा होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय सरकार से राहत की उम्मीद होती है, लेकिन इसके उलट लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
अन्य घटनाक्रम
इसी बीच Pakistan और Afghanistan ने Eid-ul-Fitr के मद्देनजर और Saudi Arabia, Turkey और Qatar के अनुरोध पर अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की है।
निष्कर्ष:
खाड़ी तेल संकट, आर्थिक मंदी और बढ़ती महंगाई के बीच पाकिस्तान एक गंभीर ऊर्जा और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। राष्ट्रीय दिवस जैसे बड़े आयोजन का रद्द होना इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
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