Shashi Tharoor बनाम Mani Shankar Aiyar: ईरान युद्ध पर बयान को लेकर कांग्रेस में मतभेद खुलकर सामने आए
ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं शशि थरूर और मणि शंकर अय्यर के बीच खुले पत्रों के जरिए तीखी बहस छिड़..
ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं शशि थरूर और मणि शंकर अय्यर के बीच खुले पत्रों के जरिए तीखी बहस छिड़ गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब युद्ध पर थरूर की टिप्पणी की अय्यर ने सार्वजनिक रूप से आलोचना की।
अय्यर ने थरूर के “व्यावहारिक” रुख की आलोचना की
Mani Shankar Aiyar ने पत्रिका Frontline में प्रकाशित अपने खुले पत्र में कहा कि 6 मार्च को एक टीवी इंटरव्यू में Shashi Tharoor की टिप्पणी सुनकर वह “गहराई से स्तब्ध” रह गए।
उस इंटरव्यू में Thiruvananthapuram से सांसद थरूर ने युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीति और बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही थी।
अय्यर ने इस युद्ध को “ईरान के खिलाफ इज़राइल द्वारा अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मिलकर छेड़ा गया अवैध और पापपूर्ण युद्ध” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि थरूर का दृष्टिकोण “सिद्धांतहीन, नैतिकता-विहीन और पूरी तरह लेन-देन आधारित सार्वजनिक नीति” जैसा लगता है।
अय्यर के अनुसार इस तरह का दृष्टिकोण वैश्विक राजनीति में उस सोच को बढ़ावा देता है कि “जिसकी ताकत, उसी की बात सही”।
ऑक्सफोर्ड भाषण और अमेरिका के प्रभाव का भी जिक्र
अय्यर ने थरूर के प्रसिद्ध Oxford Union में दिए गए उपनिवेशवाद विरोधी भाषण की तारीफ की, लेकिन साथ ही कहा कि उनकी वर्तमान स्थिति अमेरिका के प्रभाव के प्रति झुकाव दिखाती है।
उन्होंने थरूर के रुख की तुलना भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar की “व्यावहारिक कूटनीति” से भी की।
अय्यर ने यह भी अनुमान लगाया कि थरूर शायद प्रधानमंत्री Narendra Modi का राजनीतिक समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी सक्रियता का हवाला दिया।
थरूर का जवाब: “यह नैतिक समर्पण नहीं”
थरूर ने NDTV में प्रकाशित अपने खुले पत्र के जरिए इन आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों पर उनका दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से राष्ट्रहित पर आधारित है।
उन्होंने लिखा कि उनकी हर टिप्पणी में भारत के हित, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा को प्राथमिकता दी जाती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पत्र का लिंक साझा करते हुए थरूर ने लिखा, “मेरी आलोचना में ‘नैतिक भूल’ (मोरल अम्नेशिया) की बात कही गई है, लेकिन लगता है यहां अन्य तरह की भूलें भी काम कर रही हैं। एक ‘ओपन लेटर’ का जवाब दूसरे ‘ओपन लेटर’ से ही दिया जा सकता है।”
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले ही अपने एक लेख में ईरान पर युद्ध को ‘अवैध’ बताया था और तुरंत संघर्ष समाप्त करने की अपील की थी।
भारत की विदेश नीति को लेकर भी बहस
अपने जवाब में थरूर ने भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru की विदेश नीति की विरासत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की कूटनीति गुटनिरपेक्षता से आगे बढ़कर अब बहुध्रुवीय दुनिया में “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति की ओर विकसित हुई है।
थरूर के अनुसार इस नीति का मुख्य उद्देश्य हमेशा राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा और वैश्विक न्याय की वकालत करना रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीति पर जोर देने का कारण व्यावहारिक भी है, क्योंकि भारत के आर्थिक हित और वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग Strait of Hormuz की स्थिरता से जुड़ा हुआ है।
यही वजह है कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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